कौन थी स्नेहलता, आखिर क्यों मिली आपातकाल में इतनी यातनाएं, अटल बिहारी को सुनाई देती थी चीखें

25 जून 1975, भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में इस दिन को देश के सबसे दुर्भाग्यपूर्ण और भारत देश के इतिहास में एक काला अध्याय माना जाता है

कौन थी स्नेहलता, आखिर क्यों मिली आपातकाल में इतनी यातनाएं, अटल बिहारी को सुनाई देती थी चीखें
25 जून 1975, भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में इस दिन को देश के सबसे दुर्भाग्यपूर्ण और भारत देश के इतिहास में एक काला अध्याय माना जाता है। 47 साल पहले भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी आपातकाल की घोषणा करके पुरे देश को हिला दिया विरोधी दल सड़कों पर उतर आए थे। जेलें खचाखच भर चुकी थी। यह आपातकाल 21 मार्च 1977 को समाप्त हुआ था। देश में 19 महीने के लिए आपातकाल लगाया गया था। 19 महीनों में लाखों लोगों को जेल में डाल दिया गया और बेवजह प्रताड़ित किया गया। लेकिन इस आपातकाल में कई ऐसे लोगों को कई महीनों तक यातनाएं झेलनी पड़ी जो पूरी तरह से निर्दोष थे। 

संसद भवन उड़ाने के लगे थे आरोप 

हम बात कर रहे है उस अभिनेत्री की जिसे आपातकाल के दौरान जेल में डाला गया था। कन्नड़ और तेलगु जगत से स्नेहलता अभिनेत्री के साथ साथ एक सामजिक कार्यकर्ता थी। स्नेहलता पर आरोप लगे थे की वह डायनामाइट से संसद भवन को उड़ाना चाहती थी लेकिन इस तरह के लगे गंभीर आरोप साबित नहीं हो पाए। लेकिन आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम के तहत स्नेहलता की कैद जारी रही। मीसा अधिनियम वही अधिनियम है जिसके तहत आपातकाल के दौरान सबसे अधिक गिरफ्तारियां की गई थीं। 

कौन थी स्नेहलता 

वैसे स्नेहलता एक ईसाई धर्मांतरितों के घर में पैदा हुई थी। 1932 में आंध्र प्रदेश राज्य में स्नेहलता का जन्म हुआ था। उन्होंने औपनिवेशिक शासन का कड़ा विरोध किया। उसने अंग्रेजों से इस हद तक नाराजगी जताई थी कि वह अपने भारतीय नाम पर लौट आई और केवल भारतीय कपड़े पहने। स्नेहलता का विवाह कवि, गणितज्ञ और फिल्म निर्देशक पट्टाभि रामा रेड्डी से हुआ था। यह जोड़ा प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और कार्यकर्ता डॉ. राम मनोहर लोहिया को समर्पित था।

अटल बिहारी जी को सुनाई देती थी चीखें 

कुलदीप नय्यर द्वारा लिखी हुई किताब इमरजेंसी रीटोल्ड में जिक्र किया गया है की महीनों तक स्नेहलता के साथ अत्याचार होता रहा। स्नेहलता अस्थमा की मरीज थी इसके बावजूद उन्हें एक छोटी सी कोठरी में कैद कर रखा था। उस कोठरी में टॉयलेट के नाम पर बस एक छेद मात्र था। कहा जाता है कई महीनों तक स्नेहलता फर्श पर सोती रही। पूरे 8 महीने तक स्नेहलता को फर्जी केस में बेरहमी से प्रताड़ित किया गया। अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी, जो उनके बगल में जेल में बंद थे। 

जिन्होंने बाद में बताया कि उनकी कैद के दौरान उन्होंने एक महिला को चिल्लाते हुए सुना। बाद में पता चला कि वह महिला कन्नड़ अभिनेत्री स्नेहलता थी। स्नेहलता ने मानवता अधिकार के समक्ष स्नेहलता ने अपनी यातनाओं रखते हुए कहा था आस्थमा की मरीज होते हुए भी उन्हें किसी तरह की चिकित्षक उपचार नहीं मिला था। जेल में तबीयत बिगड़ने के कारण उन्हें 15 जनवरी 1977 को पैरोल पर रिहा किया गया था। रिहा होने के 5 दिन बाद 20 जनवरी को दिल का दौरा पड़ने से उनका निधन हो गया।