क्या है हरक और हरीश के बीच उपजे 'नए प्रेम' का कारण

उत्तराखंड में चुनावो से ठीक पहले नेताओ के बोल बदलते दिखाई दे रहे है। हरक सिंह और हरीश रावत के बीच जहाँ अब तक वाक युद्ध चरम पर था वही दोनों के सुर अब कुछ नरम पड़ते आ रहे है। 

क्या है हरक और हरीश के बीच उपजे 'नए प्रेम' का कारण

उत्तराखंड में चुनावो से ठीक पहले नेताओ के बोल बदलते दिखाई दे रहे है। हरक सिंह और हरीश रावत के बीच जहाँ अब तक वाक युद्ध चरम पर था वही दोनों के सुर अब कुछ नरम पड़ते आ रहे है।  कांग्रेस में वापिस आने को लेकर हरक सिंह ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले है इसी बीच जहाँ एक ओर वह दिल्ली जाकर पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा से मिल आये तो वही दूसरी तरफ नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह से भी मुलाक़ात की। ताज़े घटनाक्रम में हरक सिंह हरीश रावत को अपना बड़ा भाई बताते हुए देखे गए तो वही हरीश रावत ने भी कहा की यदि किसी का ह्रदय परिवर्तन होता है तो यह अच्छी बात है।

क्या हो सकती है हरक की कांग्रेस में 'एंट्री' ?

अभी तक ऐसा ही माना जा रहा था की हरक सिंह की कांग्रेस में एंट्री को लेकर हरीश रावत ने 'वीटो' लगा दिया है लेकिन बदले घटनाक्रम में दोनों के इस 'ह्रदय परिवर्तन' को लेकर प्रदेश में सुर्खियों का बाजार गरम है। 2017 में कांग्रेस से बगावत करके भाजपा में जाने वाले नेताओ का हरक सिंह नेतृत्व करते हुए नज़र आये थे और हरीश रावत ने भी बार बार इस चीज़ को दोहराया है।  हरदा के यहाँ तक कह दिया था की जब तक बागी नेता सार्वजनिक रूप माफ़ी नहीं मांग लेते उनकी कांग्रेस में एंट्री नहीं होगी इसलिए दोनों के बीच उपजे इस नए ' प्रेम ' के मायने भी देखने होंगे। 

कांग्रेस में अभी अंदरूनी खीचतान चल रही है। हरीश रावत ओर प्रीतम सिंह के गुट इसमें मुखर नज़र आ रहे है, यशपाल आर्य को वापस लाकर हरीश रावत ने अपना कद बढ़ाया है ऐसे में यदि हरक सिंह कांग्रेस में वापिस आते है तो इसका सेहरा किसके सर सजाया जायेगा यह प्रासंगिक सवाल फिलहाल हवाओ में तैर रहा है।