प्रेम नगर के निवासियों पर गहराया पानी का संकट गणेश जोशी ने कैंटोमेंट बोर्ड को ठराया दोषी

सौ परिवारों पर पानी संकट को लेकर गणेश जोशी व पूर्व राज्य मंत्री मनीष कुमार ने कैंटोमेंट बोर्ड को ठराया दोषी

प्रेम नगर के निवासियों पर गहराया पानी का संकट गणेश जोशी ने कैंटोमेंट बोर्ड को ठराया दोषी

गुरूवार आज प्रेस वार्ता के दौरान कांग्रेस महामंत्री नवीन जोशी ने पानी की समस्या पर कहा की कैंट विधानसभा के अंतरगर्त प्रेम नगर मे पुराने पाइप लाइन को हटाकर नई पाइप लाइन डाली गई है और पुराने कनेक्शन लोगों के घरों तक जा रहे थे उनको कैंट बोर्ड द्वारा ऐसे ही छोड़ दिया साथ कहा गया की वह अपना कनेक्शन खुद ही कर ले हालाकिं मध्यम वर्गीय परिवार की कोरोना काल के तले पहले से ही कमर टूटी हुई है। ऐसे मे कनेक्शन कराना आमजन की बस की बात नहीं है। लेकिन फिर भी कैंट बोर्ड बिना वजह स्थानियों पर दवाब बना रहा है। 

सौ परिवारों के सामने खड़े इस पानी के संकट को लेकर गणेश जोशी ने चेतवानी देते हुए कहा है की अगर कैंट बोर्ड ने सभी क्षेत्र वासियों को स्वयं पानी का कनेक्शन लगाकर नहीं दिया तो वह क्षेत्र वासियों के साथ मिकार आंदोलन करेंगे और अगर कोई  व्यक्ति पानी बिल का भुगतान नहीं करें तो जरूरत पड़ने पर कैंट बोर्ड का घेराव किया जाएगा। साथ ही प्रेम नगर मेँ 64 लाख की लागत से बने इनडोर बैटमिटन स्टेडियम का निर्माण कराया गया है जिसका  उद्घाटन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने किया था हालात यह है की अब वहां ताला लटका हुआ है। 

सिर्फ ताला ही नहीं वहां के हालत इतने ख़राब है की स्टेडियम के बाहर कूड़ा पड़ा रहता है जिसकी किसी तरह की देखभाल नहीं की जा रही है साथ ही युवाओं को वहां खेलने का अवसर भी नहीं मिल पा रहा है। और इनसब का जिम्मेदार कैंट बोर्ड है उनकी वजह से यह समस्या खड़ी हुई है।  क्यूंकि कैंट बोर्ड के पास रख रखाव का कोई बजट नहीं है। जोशी जी ने कहा अगर कैंट बोर्ड के पास बजट ही नहीं था तो सरकारी पैसे की बंदरबांट करने की क्या जरूरत थी। 

वहीँ प्रेस वार्ता मेँ पूर्व राज्य मंत्री मनीष कुमार ने कहा कैंटोमेंट द्वारा बनाई गई जगह जगह सड़कों मेँ गड्ढे हो गए है और आए दिन कोई न कोई दुर्घटना घटती रहती है जिसके कारण कई लोग मरते मरते बचे है बारिश मेँ सड़कों मेँ जगह जगह पानी भर जा रहा है जिससे जनता को तकलीफ होती रहती है लेकिन कैंटोमेंट की उदासीनता का खामियाजा प्रेम नगर के निवासियों को भुगतना पड़ रहा है।