बीते दिनों को याद कर भावुक हुई वंदना कटारियां,कहा जीवन भर हारने का मलाल रहेगा

टोक्यो ओलंपिक में हॉकी स्टिक का जादू बिखेरने वाली वंदना कटारिया का बीते बुधवार को देहरादून की प्रसिद्ध ग्राफ़िक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में भव्य स्वागत हुआ।

बीते दिनों को याद कर भावुक हुई वंदना कटारियां,कहा जीवन भर हारने का मलाल रहेगा

टोक्यो ओलंपिक में हॉकी स्टिक का जादू बिखेरने वाली वंदना कटारिया का बीते बुधवार को देहरादून की प्रसिद्ध ग्राफ़िक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में भव्य स्वागत हुआ। वंदना कटारिया के आते ही यूनिवर्सिटी का हॉल तालियों की घरघराहट की खूंज से भर गया। इस समारोह के दौरान वंदना ने कहा की वर्षों के संघर्ष और परिवार के सहयोग के बाद हैट्रिक गर्ल का खिताब मिला। इस समारोह के दौरान ग्राफ़िक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के ओर से वंदना को 11 लाख की धनराशि भेंट की गई। 

मंच पर भावुक हुई वंदना 

इतिहास रच देने वाली महिला हॉकी टीम की खिलाडी वंदना कटारिया अपने बीते दिनों को याद कर भावुक हो पड़ी। ज्यादतर खिलाड़ी गरीब घरों से आते है प्रतिसपर्धा होने के बावजूद खेलों की तैयारी करने में गरीबी सबसे बड़ी जंजीर बनती है। वंदना ने अपनी बहन रीना कटारिया का जिक्र करते हुए कहा की जब वह 2004 में  स्पोर्ट्स स्टेडियम में प्रैक्टिस करती थी दोनों के पास केवल जोड़ी स्पोर्ट्स शूज थे जिसे कभी वो पहन कर करती थी तो कभी मैं। 

गोल्ड मेडल लिए भूली बैठी थी घर 

वंदना ने बताया टोक्यो ओलंपिक की तैयारी के लिए करीब डेढ़ साल पहले घर से निकल गई थीं। गोल्ड मैडल लाने के जिद्द में वो अपना घर परिवार सब भूल बैठी थी। अपने पिता से भी टोक्यो ओलंपिक से मेडल लाने का वादा किया था। वंदना ने इस दौरान कहा कि गरीब घरों की प्रतिभाओं को आर्थिक रूप से प्रोत्साहित करके सामने लाने की जरूरत है। 


पिता के नहीं कर पाए थे अंतिम दर्शन 

वंदना ने बताया कि टोक्यो ओलंपिक के शुरूआत के तीन मैचों में बुरी हार के चलते उनकी टीम टूटने लगी थी थी साहस अंदर से जवाब दे रहा था। लेकिन फिर टीम में ऊर्जा लाने में पॉजिटिव मोटिवेशन बहुत काम आया लेकिन एक तरफ दुःख भी है की उन्हें अपने पिता के अंतिम दर्शन करने अपने गांव नहीं आ पाई थी। 


जीवन रहेगा मलाल 

वंदना ने मैच को याद करते हुए बताया की हमारी टीम सेमीफाइनल में मेडल के बहुत ज्यादा करीब पहुंच गए थे लेकिन मैच हारने का जीवनभर मलाल रहेगा। उन्होंने कहा कि पापा ने हमेशा बस यही कहा कि बेटा ओलंपिक से पदक लेकर आना। जापान से लौटते समय यही सोच रही थी कि जब घर जाऊंगी तो उस जगह को कैसी देखूंगी। जहां पापा सोते और रहते थे। वंदना ने कहा पापा का यह सपना एक दिन जरूर पूरा करूंगी। 

रोशनाबाद स्टेडियम बहुत लक्की है 

वंदना कटारिया ने कहा कि स्पोर्ट्स स्टेडियम रोशनाबाद उनके लिए बहुत लक्की है। उन्होंने कहा कि मैंने हॉकी की शुरूआत यहीं से की थी। यह उनकी कर्मभूमि है। आज मैं जो कुछ भी हूं वो इसी स्टेडियम में सिखाए गए हॉकी के हुनर से हो सका है। स्टेडियम बहुत अच्छा है और छात्रावास भी है। जिससे यहां हॉकी खिलाड़ियों खासकर लड़कियों के लिए अच्छी सुविधाएं हैं। 

भीड़ के चलते टूटा शीशा 

सम्मान समारोह में अव्यवस्थाएं भी हावी रहीं। कार्यक्रम में व्यवस्था बनाने के लिए पुलिस की मौजूदगी के बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कोई कोशिश नहीं की गई। वंदना के परिजन और कुछ युवा ही सुरक्षा घेरा बनाकर वंदना को सुरक्षित ले जाते हुए नजर आए।  जिला क्रीड़ा अधिकारी के कक्ष में भारी भीड़ जुटने से अव्यवस्था के साथ एक शीशा भी टूट गया हालाकिं राहत की बात है की किसी को चोट लग गई।