उत्तराखंड: लद्दाख विश्वविद्यालय में छात्र करेंगे ग्लेशियरों और नदियों पर विस्तृत अध्ययन

ग्लेशियरों और नदियों के विस्तृत अध्ययन के लिए लद्दाख विश्वविद्यालय परिसर में सेण्टर ऑफ़ एक्सीलेंस स्थापित करेगा।

उत्तराखंड: लद्दाख विश्वविद्यालय में छात्र करेंगे ग्लेशियरों और नदियों पर विस्तृत अध्ययन

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी भारत-चीन सीमा पर स्थित लद्दाख के हिमालयी भूविज्ञान के विस्तृत अध्ययन के साथ-साथ ग्लेशियरों और नदियों के विस्तृत अध्ययन के लिए लद्दाख विश्वविद्यालय परिसर में सेण्टर ऑफ़ एक्सीलेंस स्थापित करेगा। हिमालयी क्षेत्र। इसके लिए लद्दाख यूनिवर्सिटी और वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के बीच समझौता हुआ है। समझौता ज्ञापन पर संस्थान के निदेशक डॉ कालाचॉद साई और लद्दाख विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर एसके मेहता ने हस्ताक्षर किए। 

वैज्ञानिकों को शोध में काफी मदद मिलेगी

वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी और यूनिवर्सिटी ऑफ लद्दाख के बीच हुए समझौते में यह सहमति बनी कि दोनों संस्थानों के विशेषज्ञ हिमालयन जियोलॉजी का संयुक्त अध्ययन करेंगे और वैज्ञानिक ज्ञान को एक दूसरे के साथ साझा करेंगे। वाडिया संस्थान के निदेशक डॉ. कालाचॉद साई ने कहा कि लद्दाख विश्वविद्यालय के साथ हुए समझौते के बाद वाडिया संस्थान के वैज्ञानिकों को शोध में काफी मदद मिलेगी। विश्वविद्यालय परिसर में उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने के लिए विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। भवन निर्माण के साथ ही अत्याधुनिक उपकरणों से लैस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस भी स्थापित किया जाएगा, जहां वाडिया संस्थान के वैज्ञानिक समय-समय पर हिमालय भूविज्ञान से जुड़े पहलुओं का अध्ययन करेंगे। 

हिमालयी राज्यों में पारिस्थितिकी तेजी से बदल रही है

निदेशक ने कहा कि भारत समेत पूरी दुनिया में तेजी से हो रहे जलवायु परिवर्तन के कारण उत्तराखंड समेत देश के सभी हिमालयी राज्यों में पारिस्थितिकी तेजी से बदल रही है। ऐसे में हिमालय की पारिस्थितिकी का विस्तार से अध्ययन करने की जरूरत है। वैसे भी सामरिक महत्व के कारण लद्दाख जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र का सभी पहलुओं पर अध्ययन करने की आवश्यकता है। एमओयू पर हस्ताक्षर करते हुए डॉ. एसके राय, डॉ. आरके सहगल, डॉ. विक्रम गुप्ता, डॉ. आरजे पेरुमल, डॉ. कौशिक सेन, डॉ. नरेश कुमार, डॉ. एके सिंह, डॉ. समीर तिवारी, वाडिया संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक , डॉ आरके सहगल। सहित संस्थान के कई वरिष्ठ वैज्ञानिक मौजूद र