शिक्षा में चौथे स्थान पर इतरा रहा उत्तराखंड ने नहीं ली परवर्तीय क्षेत्रों के स्कूलों की सुध

सतत विकास लक्ष्य इंडेक्स रिपोर्ट में शिक्षा की गुणवत्ता में उत्तराखंड चौथे स्थान पर है लेकिन परवर्तीय क्षेत्रों के स्कूल का हाल बदहाल

शिक्षा में चौथे स्थान पर इतरा रहा उत्तराखंड ने नहीं ली परवर्तीय क्षेत्रों के स्कूलों की सुध

सतत विकास लक्ष्य इंडेक्स रिपोर्ट में शिक्षा की गुणवत्ता में उत्तराखंड चौथे स्थान पर आ खड़ा हुआ है। लेकिन बच्चों के भविष्य के साथ इतना बड़ा मजाक देखिए की ऊपरी परवर्तीय क्षेत्रों में तीन साल से कक्षा एक से आठवीं तक सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों ने किताबों के चेहरे तक नहीं देखे यहां तक मुफ्त बच्चों के लिए किताबों को छपवाने का बंदोबस्त नहीं हुआ।

कुछ आंकड़ों के मुताबिक करीब साढ़े छह लाख से ज्यादा बच्चे स्कूल के साथ किताबों देखने को भी तरस गए। बता दे की पिछले पूरे सत्र में कक्षा एक से पांचवीं तक स्कूल बंद रहे फिर छठी से आठवीं तक सत्र के अंतिम दिनों में स्कूल खुले, लेकिन उसका फायदा नहीं हो सका। नए सत्र के तीन महीने गुजर चुके हैं। लेकिन अभी किसी ने भी इन बच्चों की सुध नहीं ली है। 


गांवों में बने दूरदराज पर्वतीय क्षेत्रों में प्राइमरी और जूनियर हाई स्कूल के हाल इतने बदहाल है की12 फीसद से ज्यादा स्कूलों में अब भी पेयजल, बिजली, शौचालय जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं हैं। हालांकि 87.72 फीसद स्कूल ही ठीक हाल में हैं। बुनियादी सुविधाओं से वंचित स्कूल गांवों से दूर हैं। कुछ ऐसे स्कूल जिनका हाल बेहद बुरा है। जब तक स्कूल के हालत नहीं सुधरेंगे तो बच्चों का भविष्य कैसे सुधर पाएगा।