उत्तराखंड: मदरसा शिक्षकों को 5 साल नहीं मिला था वेतन, मिस्त्री और प्लम्बर बनने पर हुए मजबूर

उत्तराखंड के 700 मदरसा शिक्षकों में से कई शिक्षक है जिन्हें पिछले पांच वर्षों से भुगतान नहीं किया गया था

उत्तराखंड: मदरसा शिक्षकों को 5 साल नहीं मिला था वेतन, मिस्त्री और प्लम्बर बनने पर हुए मजबूर

उत्तराखंड के 700 मदरसा शिक्षकों में से कई शिक्षक है जिन्हें पिछले पांच वर्षों से भुगतान नहीं किया गया था, वही अब उनका रुका हुआ वेतन आखिरकार केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया है, लेकिन केवल अक्टूबर 2016 और मार्च 2017 (छह महीने) के बीच की अवधि के लिए। टीओआई ने इस साल फरवरी में रिपोर्ट दी थी कि कैसे शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने, बीएड डिग्री प्राप्त करने और एसपीक्यूईएम (मदरसों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की योजना) के तहत प्रशिक्षित होने के बाद इन शिक्षकों को बिजली मिस्त्री और प्लंबर के रूप में काम करने के लिए मजबूर किया गया। SPQEM का उद्देश्य मदरसों में शिक्षा का आधुनिकीकरण करना और छात्रों को अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों से परिचित कराना है। 

मदरसा प्रबंधकों को भेजा जा रहा है वेतन 

सहसपुर में सामाजिक विज्ञान के शिक्षक इशरान अली ने व कई शिक्षकों ने आरोप लगाया कि भले ही केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों में कहा गया है कि वेतन सीधे उनके खाते में जमा किया जाना है, इसके बजाय उन्हें मदरसा अधिकारियों के खाते में जमा किया गया है। केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि एसपीक्यूईएम का पैसा, जो केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के तहत एक योजना है, सीधे लाभार्थी शिक्षकों के खाते में जमा किया जाना चाहिए। सरकार राज्य को योजना के पैसे जमा करने के लिए पीएफएमएस (पब्लिक फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम) का उपयोग करने की भी सिफारिश करती है। फिर भी मदरसा प्रबंधकों को वेतन भेजा जा रहा है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, खासकर उधमसिंह नगर और हरिद्वार में स्थित मदरसों में, जहां प्रबंधक ने पूरी राशि रखी है या वेतन को शिक्षक के खाते में स्थानांतरित करने के लिए कमीशन के रूप में कटौती की है। 


2 करोड़ रुपये से अधिक का वेतन बजट

उत्तराखंड में 400 से अधिक मदरसे हैं - ज्यादातर मैदानी जिलों में स्थित हैं। इनमें से लगभग 270 SPQEM योजना में नामांकित हैं। इनमें से अधिकांश राज्य मदरसा बोर्ड से संबद्ध हैं, जबकि लगभग 40 मदरसे राज्य शिक्षा विभाग से संबद्ध हैं। 2 करोड़ रुपये से अधिक का वेतन बजट, जो अक्टूबर 2016 से मार्च 2017 की अवधि के लिए जारी किया गया है, केवल उन एसपीक्यूईएम शिक्षकों के लिए है जो उत्तराखंड मदरसा शिक्षा बोर्ड (यूएमईबी) से संबद्ध 200 मदरसों में पढ़ा रहे हैं।  

प्रबंधक ही जानता है शिक्षक ने कितने दिन काम किया है 

इस बीच, राज्य के शिक्षा विभाग से जुड़े मदरसों में कार्यरत करीब 100 शिक्षकों को अभी तक कोई भुगतान नहीं मिला है। इस मुद्दे के बारे में पूछे जाने पर, राज्य अल्पसंख्यक विभाग के निदेशक, सुरेश जोशी ने कहा, “केंद्र सरकार के दिशानिर्देशों में कहा गया है कि पैसा मदरसा प्रबंधक के खातों में भेजा जाना चाहिए जो इसे शिक्षकों को भेज देगा। यह काफी तार्किक भी है क्योंकि यह केवल प्रबंधक ही जानता है कि एक शिक्षक ने कितने दिन काम किया है। योजना के अनुसार स्नातक शिक्षक को 6,000 रुपये जबकि बीएड डिग्री धारक को 12,000 रुपये प्रति माह की पात्रता है।