उत्तराखंड: भूमिहीन किसानों को अब बैंक की ओर से मिलेगा ऋण

प्रदेश के भूमिहीन किसानों और अकृषि क्षेत्र के छोटे उद्यमियों को आसानी से अब ऋण उपलब्ध हो सकेगा।

उत्तराखंड: भूमिहीन किसानों को अब बैंक की ओर से मिलेगा ऋण

प्रदेश के भूमिहीन किसानों और अकृषि क्षेत्र के छोटे उद्यमियों को आसानी से अब ऋण उपलब्ध हो सकेगा। इसके लिए रास्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गए है। प्रदेश के 13 जिलों में आगामी तीन साल तक एसबीआई की ओर से एक हजार संयुक्त देयता समूह (जेएलजी) को वित्त पोषण किया जाएगा। वही इन समूहों के माध्यम से भूमिहीन किसानों व छोटे उद्यमियों को कर्ज उपलब्ध कराया  जाएगा। 

जिनके पास भूमि का रिकॉर्ड नहीं है 

आईटी पार्क स्तिथ नाबार्ड के क्षेत्रीय कार्यालय में नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक डॉ ज्ञानेंद्र मणि की अधक्ष्यता में महाप्रबंधक भास्कर पंत और एसबीआई के महाप्रबंधक अभय सिंह ने समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। इसमें एसबीआई की ओर से संयुक्त देयता समूह का वित्त पोषण किया जाएगा। प्रदेश में हजारों भूमिहीन, बटाईदार, पट्टेदार, छोटे और मझोले किसान है जिनके पास भूमि का रिकॉर्ड नहीं है। 

आवश्यकता के अनुसार दिया जाएगा ऋण

वही अकृषि क्षेत्र के छोटे उद्यमी जिनके पास बैंक ऋण के लिए कोई संपत्ति नहीं है तो ऐसे में उन्हें बैंक से ऋण नहीं मिलता है। अब ऐसे किसान व छोटे उद्यमी औपचारिक बैंकिंग व्यवस्थाओं से आसानी से ऋण प्राप्त कर सकेंगे। मुख्य महाप्रबंधक नाबार्ड ने कहा की संयुक्त देयता समूहों के माध्यम से आवश्यकता के अनुसार ऋण की सुविधा दी जाएगी। एसबीआई के महाप्रबंधक अभय सिंह ने कहा है की कृषि और ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक से अधिक लोगों की ऋण आवश्यकता पूर्ति के लिए प्रयास किए जा रहे है। 


किसानों को डिजिटल प्लेटफार्म सुविधा की जा रही है वही इस मौके पर नाबार्ड के मुख्य महाप्रबंधक एपी दास, उप महाप्रबंधक एसएल बिड़ला, तनूजा प्रसाद, एसबीआई उप महाप्रबंधक राजीव रत्न श्रीवास्तव, उप महाप्रबंधक  राज कुमार सिंह, एसएलबीसी के संयोजक नरेंद्र रावत मौजूद थे।