उत्तराखंड ने दिलाई दो ट्रांसजेंडर महिलाओं को कानूनी पहचान

दो ट्रांसजेंडर महिलाओं उत्तराखंड ने दिलाई कानूनी पहचान दोनों को समाज कल्याण विभाग देहरादून की ओर से पहचान प्रमाण पत्र किया जारी

उत्तराखंड ने दिलाई दो ट्रांसजेंडर महिलाओं को कानूनी पहचान

कहते है जो प्रकृति एक बार जो आपको बना देती है उसे ना चाह कर भी स्वीकार करना पड़ता है। वहीं पुरुष और महिलाओं से अलग जेंडर यानी किन्नर समाज भी अब आम समाज का हिस्सा बनते जा रहे है। वहीं इसकी पहल करते हुए उत्तराखंड पहली बार दो ट्रांसजेंडर महिलाओं को समाज कल्याण विभाग देहरादून की ओर से पहचान प्रमाण पत्र जारी किया गया है।  

उत्तरकाशी में जन्मे सुनील और देहरादून में जन्मे विक्रम थापा जैसे जैसे बड़े बड़े होने लगे उन्हें समझ में आने लगा था की हम इस समाज से अलग है। लेकिन दोनों के मन में इस बात को लेकर संकोच बहुत सालों तक बना रहा। लेकिन फिर दोनों ने इस समाज का दामन छोड़ते हुए खुद की पहचान बनाने में निकल गई। इसके बाद दुनिया को अपनी सच्चाई बता कर दिल्ली में जेंडर रीअसाइनमेंट सर्जरी करवाई। लेकिन, कानूनी रूप से अलग पहचान मिल पाने का सपना उनके दृढ़ निश्चय से ही संभव हो पाया। अब इनकी पहचान अदिति शर्मा (सुनील) और काजल (विक्रम थापा) के रूप में है। 

वहीं अब सुनील से अपनी पहचान बना चुकी अदिति बताती है की शारीरिक बदलाव को देखते हुए वो समझ गई थी ट्रांसजेंडर महिला है लेकिन उन्होंने इस बात को अपने ग्रेजुएशन की पढाई तक छुपा रखा। शारीरिक बदलाव होने के कारण समाज भी उसे अलग नजरिए से देखता था। जैसे वह इंसान न होकर एलियंस हो। लेकिन जब अदिति ने अपनी इस सच्चाई को परिवार और रिश्तेदारों के सामने रखा तो उनकी इस सच्चाई को अस्वीकार कर दिया गया। जिसके बाद अदिति ने अपना घर छोड़ देहरादून आ गई। वहीं काजल अभी भी अपने परिवार के साथ रहती है। 

नताशा का महत्वपूर्ण योगदान

ट्रांसजेंडर महिलाओं को पहचान पत्र दिलाने में चमोली निवासी पोस्ट ग्रेजुएट नताशा नेगी की अहम भूमिका रही है। नताशा कहती हैं कि उनका जन्म पुरुष के रूप में हुआ, लेकिन धीरे-धीर लगने लगा कि वो एक ट्रांसजेंडर महिला हैं। उन्हें कई परेशानियां झेलनी पड़ीं। वह 2016 से स्वयं को पहचान दिलाने के लिए प्रयास कर रही हैं। अदिति और काजल के साथ उन्होंने भी पहचान पत्र के लिए आवेदन किया था। लेकिन, कुछ कमियों के चलते उनका आवेदन निरस्त हो गया। बताया कि वो अब फिर से आवेदन कर रही हैं। इसके अलावा सात अन्य ट्रांसजेंडर महिलाओं ने भी आवेदन की प्रक्रिया के बारे जानकारी ली है, जबकि तीन ऐसी ट्रांसजेंडर महिलाएं भी हैं, जिन्होंने जेंडर रीअसाइनमेंट सर्जरी की है।