उत्तरप्रदेश: मोमबत्ती लेकर धरने पर बैठे सिया और राम

हम सभी बचपन से बड़े होने तक रामलीला देखते आ रहे है और उसमे सिया-राम का पात्र अधिकतर लोगों के मन को काफी भाता आया है

उत्तरप्रदेश: मोमबत्ती लेकर धरने पर बैठे सिया और राम

हम सभी बचपन से बड़े होने तक रामलीला देखते आ रहे है और उसमे सिया-राम का पात्र अधिकतर लोगों के मन को काफी भाता आया है, लेकिन कलयुग में इस रामलीला का हश्र देख सभी आचम्भित रह गए, जब रामलीला के मुख्य पात्र राम, लक्ष्मण और सीता को ही रामलीला के मंच पर धरने में बैठना पड़ा, दरअसल मुरादाबाद के थाना नागफनी अंतर्गत आने वाले दसवां घाट के रामलीला मैदान में होने वाली रामलीला के मुख्य पात्रों राम लक्ष्मण और सीता को रामलीला छोड़, हाथों में मोमबत्ती लेकर रामलीला के मंच पर ही लोगों के साथ धरने पर बैठना पड़ा। वजह थी रामलीला मंचन के लिए बिजली का न मिलना। 

जरेटर से चल रहा है काम 

पिछले 4 अक्टूबर से प्राचीन रामलीला कमेटी की ओर से रामलीला का मंचन जनरेटर के सहारे चल रहा है। जिसमें कमेटी का मोटा पैसा जनरेटर के खर्चे में ही जा रहा है। प्राचीन रामलीला कमेटी के अनुसार दसवां घाट पर पिछले 50 सालों से रामलीला का मंचन होता चला आ रहा है। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष ने बताया की  कमेटी की ओर से मंचन से पहले ही नगर निगम और बिजली विभाग से हमेशा की तरह इस बार भी रामलीला मंचन हेतु बिजली की सुविधा देने का आग्रह किया, लेकिन मंचन 4 अक्टूबर से शुरू हो गया था। 


बिजली विभाग ने किया साफ़ मना 

लेकिन दुःख की बात यह है की आज तक बिजली की सुविधा नहीं मिल पाई और जनरेटर के सहारे ही कार्यक्रम हो रहा है, जिसमें बहुत मोटा खर्चा आ रहा है। लेकिन कोई भी सुनने वाला या समस्या का समाधान करने वाला नहीं, सब एक दूसरे पर टाल रहे हैं, बिजली विभाग ने साफ मना कर दिया। रामलीला में श्रीराम का किरदार निभाने वाले कलाकार ने भी बताया कि रामलीला कमेटी बहुत कोशिश कर रही है कि मंचन के समय बिजली की व्यवस्था हो जाये लेकिन कोई सुन ही नहीं रहा। बस इसी समस्या के समाधान के लिए रामलीला का मंचन नहीं हो पा रहा है, कमेटी के सारे लोग परेशान हैं,चंदा करके इनके सारे पैसे जनरेटर और तेल में खर्च हो जाते हैं।