दो इंटरप्रेन्योर बहने जिन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर की जॉब छोड़कर बनाया अपना खुद सूता ब्रांड

सुजाता और तान्या विश्वास का कपड़ों और फैशन की दुनिया से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। लेकिन साड़ियों के लिए प्यार इतना गहरा था कि दोनों ने अपनी कॉरपोरेट नौकरी छोड़ दी और 'सूता' ब्रांड बनाया। 

दो इंटरप्रेन्योर बहने जिन्होंने कॉर्पोरेट सेक्टर की जॉब छोड़कर बनाया अपना खुद सूता ब्रांड

साड़ी एक ऐसा परिधान है जिससे भारतीय महिला कभी भी दूर नहीं रह सकती। हम सभी ने ज्यादातर अपनी दादी और माँ को साड़ी में देखा है और उनकी साड़ियों को आज भी कमरे में रखी अलमारी में संजों के रखा है। लेकिन उस दौर से आज के दौर में फर्क सिर्फ इतना है की आज के समय की लड़किया साड़ी पहनने के लिए शादी तक का इन्तजार नहीं करती। शायद इन्ही बातों को ध्यान में रखते हुए दो बहनों ने कॉरपोरेट सेक्टर में जॉब छोड़कर साड़ियों का कारोबार करने का सोचा। सुजाता और तान्या विश्वास का कपड़ों और फैशन की दुनिया से दूर-दूर तक कोई नाता नहीं था। लेकिन साड़ियों के लिए प्यार इतना गहरा था कि दोनों ने अपनी कॉरपोरेट नौकरी छोड़ दी और 'सूता' ब्रांड बनाया। 


यहां न केवल खूबसूरत साड़ियां बनाई जाती हैं, बल्कि बुनकरों को सशक्त बनाने के लिए दोनों बहने काम कर रही है। सुजाता ने साझा किया कि फैशन या कपड़ों में कोई पृष्ठभूमि नहीं होने के बावजूद, दोनों बहनों ने एक ऐसा ब्रांड शुरू करने की आवश्यकता और इच्छा महसूस की जो बुनकर और कारीगर समुदाय को सकारात्मक रूप से प्रभावित करेगा और भारत की भूली हुई कला को पुनर्जीवित करेगा। वह कहती हैं, “हमारे पास 16,000 बुनकर और कारीगर हैं जो हमारे साथ अनुबंध के आधार पर काम करते हैं। हम उनके परिवार के अन्य सदस्यों को भी रोजगार प्रदान करते हैं। 


सुजाता बताती है की एक बार साल 2017 में वह मुंबई के द लील फ़्ली प्रदर्शनी में अपना स्टाल लगाया था लेकिन अचानक आग लगने से काफी नुकसान हो गया था और उन दिनों सुजाता पांच महीने की गर्भवती थी। संकट के क्षणों में, सुजाता और तानिया अपने परिवार पर और अधिक महत्वपूर्ण रूप से एक-दूसरे पर निर्भर थीं। उम्र में सिर्फ डेढ़ साल के अंतर से, बहनों ने अपनी अनूठी प्रतिभाओं को कामयाबी के शिखर पर लाना जारी रखा है, जिससे ब्रांड को मजबूती से बढ़ने में मदद मिली है। वही अब दोनों बहने साल 5.5 करोड़ के राजस्व पर हैं। 

क्या है सूता ब्रांड

1 अप्रैल 2016 को, सुजाता और तान्या विश्वास ने अपने कॉरपोरेट करियर को अलविदा कह दिया और 'सूता' (जिसका अर्थ है 'धागा') नाम का एक ब्रांड बनाने के लिए खुद को पूरी तरह से समर्पित कर दिया। अपने ब्रांड के तहत बुनकर और कारीगर समुदायों को सशक्त बनाने के प्रयास के साथ, उन्होंने पारंपरिक शिल्प पर भी ध्यान केंद्रित किया। यह ब्रांड मुख्य रूप से अपनी बेहतरीन गुणवत्ता वाली सूती साड़ियों, जामदानी बुनाई, मलमल, मलकेश और बनारसी साड़ियों के लिए जाना जाता है।

ग्राहकों को कुछ नया देंगे

इंटरप्रेन्योर सुजाता बताती है की मेरी यात्रा शानदार रही है क्योंकि इसे आधिकारिक तौर पर साढ़े पांच साल हो गए हैं। लेकिन यह बहुत लंबा लगता है क्योंकि एक इंटरप्रेन्योर को बहुत सी चीजें करनी होती हैं। इसलिए, हमने बहुत सारे उतार-चढ़ाव देखे हैं। यह एक सुंदर सीखने का अनुभव है। और यह उल्लेखनीय रूप से दिलचस्प है। क्योंकि हमें भारत में बहुत से लोगों के साथ काम करने को मिलता है। सुजाता कहती है की हमदोनों बहनों ने अपना पहला कलेक्शन लांच किया तो हमारा पहला ध्यान था हम अपने ग्राहकों को कुछ नया देंगे। हम वास्तव में अपने ग्राहकों को कुछ ऐसा देना चाहते थे जो उन्हें बाजार में आसानी से न मिले और इसलिए हम सुता को सुर्खियों में लाए। हम जश्न मनाना चाहते थे और एक ऐसा स्थान बनना चाहते थे जो ऐसे उत्पाद पेश करता हो जो आसानी से नहीं मिलते।