महिलाओं की जिंदगी की यह 4 रोक टोक जो उन्हें आगे बढ़ने से है रोकती

महिलाओं के जीवन में कुछ न कुछ उथल पुथल मची होती है। बात करें महिलाओं के उस पड़ाव की जब वो जवानी की देहलीज में होती है

महिलाओं की जिंदगी की यह 4 रोक टोक जो उन्हें आगे बढ़ने से है रोकती

महिलाओं के जीवन में कुछ न कुछ उथल पुथल मची होती है। बात करें महिलाओं के उस पड़ाव की जब वो जवानी की देहलीज में होती है। 15 से 16 की उम्र की लड़कियों पर कई तरह की रोक टोक लगना शुरू हो जाती है। जैसा की मैंने भी अपनी नानी को कहते हुए सुना है की लड़कियों को कम हँसना चाहिए, दूसरों के सामने कम बोलना चाहिए ढकें हुए कपड़ें पहनने चाहिए आदि। हालाकिं नानी की आवाज में नरमी थी लेकिन उनकी बातों में एक फटकार भी थी। मुझे याद है जब मुझे नानी ने समझाया था कि एक महिला या एक लड़की की हंसी कभी भी इतनी तेज नहीं होनी चाहिए की घर के बाहर या छत तक पहुंच जाएँ। 


हालाकिं आज के समय में आज की लड़कियों को यह बात अजीब लग सकती है। क्यूंकि आज की लड़कियों का अपना ही उठने बैठने का तरीका है। लेकिन बात करें बूढ़ी दादी और नानियों की तो शायद यह एक तरह की परम्परा बन जाता है की यह सारी बातें और आदतें हमारी माओं को सिखाई जाती है। हालाकिं की महिलओं की जिंदगी में ऐसे कई उदहारण है जो सिर्फ महिलाओं को कहे जाते है पुरषों को नहीं। अन्य ऐसे आकस्मिक सेक्सिस्ट बयानों पर एक नज़र डालें जो आपने शायद बहुत बार सुने होंगे।


आप एक स्वतंत्र महिला है 

पुरुष शायद कभी ऐसा बयान नहीं सुनते जो उन्हें बताता हो कि वे बहुत महत्वाकांक्षी या बहुत स्वतंत्र हैं। ऐसा शायद इसलिए है क्योंकि लोग उम्मीद करते हैं कि पुरुष बड़ा सोचें और अपने सपनों के लिए प्रयास करें। ऐसा प्रतीत होता है कि महिलाओं से इसके विपरीत अपेक्षा की जाती है और सफलता का स्वाद चखने के बाद उन्हें अपने काम पर पुनर्विचार करने के लिए कहा जाता है और उन्हें याद दिलाया जाता है कि उन्हें घर के काम के लिए समय निकालना चाहिए।

एक बच्चे के बिना एक महिला का जीवन अधूरा है

महिलाएं आज अपने आप में मजबूत, सफल और पूरी तरह से खुश हैं। फिर भी, कई लोग मानते हैं कि शादी करना और मातृत्व का अनुभव करना ही उसके जीवन का एकमात्र लक्ष्य है। मां बनने की इच्छा न होने के बावजूद उन्हें अक्सर बच्चे न चाहने या जीवन में जल्दी बच्चे पैदा करने के लिए राजी करने के लिए फटकार लगाई जाती है। समस्याग्रस्त हिस्सा यह है कि यह सलाह अक्सर उसके जीवन में अन्य महिलाओं से आती है जैसे महिला रिश्तेदार के अलावा मां और सास भी।

शांत रहों और ओवरएक्टिंग मत करों 

यह एक ऐसा कथन है जिसे महिलाएं सुनना याद करती हैं, लेकिन यह एक ऐसा कथन है जो पुरुषों को कभी नहीं बताया जाता है। आधार यह है कि महिलाएं नाटकीय होती हैं चाहे वह कार्यस्थल पर हो या यहां तक ​​कि एक मां के रूप में या घर के मामलों में। हालांकि, यह सच से बहुत दूर है, और हम इसे उतनी ही गंभीरता से लेना पसंद करेंगे जितना कि पुरुष जब किसी मुद्दे के बारे में जोश के साथ हमारी चिंता व्यक्त करते हैं। 

शरीर को ढककर रखों 

किशोर लड़की हो या 35 वर्षीय कामकाजी महिलाएं अपने जीवन में अक्सर अजनबियों, शिक्षकों और यहां तक ​​कि परिवार के सदस्यों से अपने कपड़ों को लेकर ट्रोल्स होती रहते है की आपको ऐसे नहीं बल्कि ऐसे कपड़े पहनना चाहिए। कपड़ों की पसंद स्कर्ट से लेकर पैंटसूट या ड्रेस तक कुछ भी हो सकती है।  लेकिन ऐसे बयानों के पीछे की सोच ही असली समस्या है। क्योंकि कितनी बार पुरुषों को कहा जाता है कि वे बहुत अधिक शरीर दिखा रहे हैं? टॉपलेस होने पर क्या उन्हें फटकार भी लगती है? शायद नहीं।