शीर्षआसन कर जताया विरोध मांगे पूरी ना होने पर होगा उग्र आंदोलन

देवस्थानम बोर्ड के खिलाफ तीर्थपुरोहित का विरोध करने का नया तरीका सामने आया है

शीर्षआसन कर जताया विरोध मांगे पूरी ना होने पर होगा उग्र आंदोलन

पिछले कुछ दिनों से चल रहे देवस्थानम बोर्ड के खिलाफ तीर्थपुरोहित का आंदोलन ख़त्म होने का नाम ही नहीं ले रहा है। वहीं केदरनाथ धाम में इस वक़्त विरोध करने का नया तरीका सामने आया है जहां अभी तक तीर्थपुरोहित मंदिर के बहार सोशल डिस्टन्सिंग के घेरे में बैठे विरोध करते नजर आ रहे थे वहीं अब तीर्थपुरोहित आचार्य संतोष त्रिवेदी ने शीर्षासन कर देवस्थानम बोर्ड का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है की एक सप्ताह तक प्रतिदिन मंदिर परिसर में 20 से 25 मिनट तक शीर्षासन कर विरोध करेंगे। उनका कहना है कि भाजपा सरकार की ओर से चारधाम तीर्थपुरोहित समाज व हक-हकूकधारियों पर देवस्थानम बोर्ड थोपा गया है जो उन्हें मंजूर नहीं है।


बता दे पिछले साल भी आचार्य संतोष त्रिवेदी ने केदारनाथ में एक माह से अधिक समय तक सुबह, दोपहर और शाम को अर्धनग्न होकर देवस्थानम बोर्ड का विरोध किया था। उनका सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है की कोरोनाकाल में यात्रा संचालन को लेकर श्रद्धालुओं की भावनाओं से मजाक करने का आरोप भी लगाया। आचार्य त्रिवेदी ने कहा कि सरकार पहले स्थानीय लोगों के साथ चर्चा कर उन्हें विश्वास में लेते हुए यात्रा की तैयारियों को पूरा करे, फिर यात्रा शुरू की जाए।


गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में तीर्थपुरोहित भी अपनी मांगों को लेकर लगातार विरोध कर रहे है। तीर्थ पुरोहितों ने मांग पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होने पर रोष जताया। तीर्थ पुरोहितों ने कहा कि सरकार ने बोर्ड पर जल्द फैसला नहीं लिया तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। साथ गंगोत्री और यमुनोत्री धाम में तीर्थपुरोहितों का काली पट्टी बांध का विरोध जारी है। तीर्थ पुरोहित राकेश सेमवाल ने कहा कि सीएम तीरथ सिंह रावत ने 51 मंदिरों सहित चारधाम को देवस्थानम बोर्ड के दायरे से बाहर करने का वायदा किया था। लेकिन आज भी तक बोर्ड पर पुनर्विचार नहीं हो पाया है।

यमुनोत्री धाम में प्रदर्शन करने वालों में गंगोत्री धाम में संजय सेमवाल, मुकेश, रवि, दिनेश, बद्री,  सुनील तथा यमुनोत्री धाम में राघवानंद उनियाल, मनमोहन उनियाल, भानुकर, आशुतोष, सुनील, सोहिन उनियाल आदि मौजूद रहे। उधर, यमुनोत्री धाम में भी तीर्थ पुरोहितों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर देवस्थानम बोर्ड को तत्काल भंग करने की मांग की।