तड़के बद्रीनाथ में हुई बर्फ़बारी कड़ाके की पड़ने लगी ठण्ड

जैसा की उत्तराखंड में लगातार बारिश का मौसम बना हुआ है रोजाना कई दिनों से खिली धुप दिख रही है

तड़के बद्रीनाथ में हुई बर्फ़बारी कड़ाके की पड़ने लगी ठण्ड

जैसा की उत्तराखंड में लगातार बारिश का मौसम बना हुआ है रोजाना कई दिनों से खिली धुप दिख रही है वही शुक्रवार बद्रीनाथ में तड़के ऊँची चोटियों में बर्फ़बारी हुई साथ ही माणा पर्वत,नीलकंठ, नर-नारायण, उर्वशी पर बर्फ़बारी हुई जिसके चलते कड़ाके की ठण्ड पड़ने लगी है। 

गुरूवार से है सड़क बंद 

बद्रीनाथ हाईवे पर मलबा आने से बद्रीनाथ व यमुनोत्री हाईवे अवरुद्ध हो गया है जोशीमठ और सेलंग मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो गया है।  बावजूद इसके भारी बारिश जारी है। यमुनोत्री हाईवे कल्याणी के पास भूस्खलन से अवरुद्ध हो गया है और गंगोत्री हाईवे पर यातायात सुचारू है। वहीं नौगांव-पौंटी-राजगढी मोटर मार्ग पर जगह-जगह मलबा आने और भू-धंसाव के कारण सड़क गुरुवार रात से बंद है।

खुद ही मलबे को हटाने का कर रहे है प्रयास 

19 सितंबर को घाट क्षेत्र में हुई बारिश से पंजातोंखा और उफ्ठर बैंड, सुतोल सड़क पेरी पुल, में भूस्खलन होने से बंद हो गई थी, जिसे अभी तक खोला नहीं गया है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को सूचना देने के बाद भी जब सड़क नहीं खुली तो गुरुवार को ग्रामीणों ने स्वयं ही सड़क पर फैले मलबे को हटाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीणों को कामयाबी नहीं मिली है। ग्रामीण हिम्मत सिंह, मेहरबान सिंह, बादल सिंह, कमल सिंह, ताजवर सिंह और रघुवीर का कहना है कि कई बार लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को कहने के बावजूद सड़क की दशा नहीं सुधारी जा रही है। सड़क भूस्खलन से कई जगहों पर क्षतिग्रस्त है। उन्होंने लोनिवि के अधिकारियों से शीघ्र सड़क खोलने की मांग उठाई।

बना हुआ भय का माहौल 

लोगों ने की सुरक्षात्मक कार्य कराने की मांग टिहरी बांध झील का जलस्तर बढ़ने से चिन्यालीसौड़ में झील के तटवर्ती इलाकों में भूस्खलन व भूधंसाव सक्रिय हो गया है, जिससे इन क्षेत्रों में रह रहे लोगों में भय का माहौल बन रहा है। जोगत रोड के व्यापारियों का कहना है कि टीएचडीसी ने झील निर्माण के 15 साल बाद भी आवासीय बस्तियों में किसी तरह का सुरक्षा कार्य नहीं किया है 
 

सुरक्षा नहीं किया ख्याल उठानी पड़ रही है परेशानी 

व्यापार मंडल अध्यक्ष कृष्णा नौटियाल पूर्व पालिका अध्यक्ष शूरवीर रांगड,विजय प्रकाश भट्ट ,विजयपाल रावत, ब्रह्मानंद बिजलवाण, कृपाल रावत, ध्रुव प्रसाद, गंभीर कलूड़ा, सतवीर राणा, ने कहा कि अगर टीएचडीसी ने समय  रहते सुरक्षा के साथ कार्य किए जाते से आज ग्रामीणों को यह परेशानी नहीं देखनी पड़ती। टीएचडीसी के अधिशासी निदेशक यूके सक्सेना का कहना है कि झील के 853 मीटर लेवल तक के लिए भूमि अधिग्रहित की गई है। इससे नीचे की लेवल की सभी संपत्तियों का भुगतान किया गया है। यहां जो भी रह रहे हैं अवैध है।