अफगानिस्तान से सलामती से लौटे देहरादून वासी, बताया वहां का खौफनाक मंजर

अफगानिस्तान में तालिबानियों के बीच फसें देहरादून के नागरिक सलामती के साथ अपने वतन अपने घरों को वापस आ गए है जहाँ उनके परिजाओं ने तो रहत की साँस ले ली है

अफगानिस्तान से सलामती से लौटे देहरादून वासी, बताया वहां का खौफनाक मंजर

अफगानिस्तान  में तालिबानियों के बीच फसें देहरादून के नागरिक सलामती के साथ अपने वतन अपने घरों को वापस आ गए है जहाँ उनके परिजाओं ने तो रहत की साँस ले ली है लेकिन वापस आए नागरिक उस खौफनाक मंजर को भूल नहीं पा रहे है। वापस आए नागरिक जोहड़ी गांव निवासी अजय कुमार थापा, दीपक कुमार, पूरन थापा और प्रेम कुमार अफगानिस्तान में ब्रिटिश एंबेसी में काम करते थे। उन्होंने इस खौफनाक मंजर के सामने सिर्फ अपनी जान बचा कर निकल पाए बाकि इनलोगों ने अपना सारा सामान वही छोड़ दिया अपने सारे डॉक्यूमेंट, कपड़े व अन्य जरुरी चीजे वही छोड़ दी। उन्होंने बताया उन गोलियों की शोर में सिर्फ अपनी जान और वतन वापसी की चिंता थी। क्यूंकि वह हालात बेहद गंभीर हो चुके थे। 

कई साथी अभी तक वहीं फंसे, भूख, प्यास से परेशान 

 पूरन थापा, अजय कुमार, प्रेमकुमार व दीपक थापा,ने बताया कि अभी भी गांव के पदम, श्याम ठाकुरी, संदीप थापा सहित अनारवाला, जोहड़ी, क्लेमेंटटाउन, ठाकुरपुर और गढ़ी के कई लोग वहां फंसे हुए हैं। वह एयरपोर्ट से महज दो-तीन किलोमीटर दूर होटल में हैं, लेकिन उन्हें निकलने का मौका ही नहीं मिल रहा है। बाहर गोलियां चल रही हैं। स्थानीय लोग उन्हें आने नहीं दे रहे हैं। उनके खाने-पीने का भी कोई इंतजाम नहीं हैं। भारत सरकार से उन्होंने मदद की गुहार लगाई है।


अभी तक तालिबानी नहीं, स्थानीय लोग रोक रहे विदेशियों को 

घर लौट चुके भारतियों ने बताया की तालिबान नहीं वहां के स्थानीय नागरिक भारतीयों के साथ अन्य विदेशियों के को रोक रहे है। क्यूंकि वे मजबूर है वो किसी तरह से वहां से बाहर निकलना चाहते है। इसलिए  दिक्कत स्थानीय लोग पैदा कर रहे हैं। वे ज्यादातर हवाई हड्डे जाने वाली बसों को रोक रहे है जिसपर तालिबानी फायरिंग करना शुरू कर देते है।  इसलिए वह भारतीय सहित विदेशियों को रोक रहे हैं, जिससे कि वह सुरक्षित रहें। इसलिए वहां होटल और अन्य क्षेत्रों में फंसे लोग एयरपोर्ट तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।