केंद्र सरकार तो यह भी कह सकती है कि देश में कोई महामारी आई थी: सत्येंद्र जैन

पिछले दो सालो से देश कोरोना का सामना करना पड़ रहा है वहीं दूसरी लहर की बात की जाएं तो करोड़ों लोगों की जान ऑक्सीजन ना मिलने की वजह से गई थी।

केंद्र सरकार तो यह भी कह सकती है कि देश में कोई महामारी आई थी: सत्येंद्र जैन

पिछले दो सालो से देश कोरोना का सामना करना पड़ रहा है वहीं दूसरी लहर की बात की जाएं तो करोड़ों लोगों की जान ऑक्सीजन ना मिलने की वजह से गई थी। वहीं इतिहास दूसरी लहर के लिए गवाह है दूसरी लहर में ऑक्सीजन के लिए देश भर में हाहाकार मचा था। वहीं ऑक्सीजन की कमी से हुई मौत का कोई भी आंकड़ा राज्यों से नहीं मिलने को लेकर केंद्र सरकार को विपक्षी दलों ने निशाने पर लिया है। जबकि दूसरी लहर के पीक पर रहने के दौरान अस्पतालों में मरीजों की मौत की कई बड़ी घटनाओं ने दुनिया भर का ध्यान भारत की ओर खींचा था। आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरा है। 


आप सरकार ने कहा, दिल्ली में हमने ऑक्सीजन से हुई मौतों की जांच के लिए ऑडिट कमेटी बनाई थी। अगर वो पैनल अब भी वहां होता तो आसानी से आंकड़ा मुहैया कराया जा सकता था। लेकिन केंद्र सरकार ने एलजी के जरिये रिपोर्ट सौंपने की इजाजत नहीं दी। दिल्ली सरकार ने ऐसी मौतों पर 5 लाख रुपये मुआवजे की पेशकश की थी, लेकिन एलजी अनिल बैजल ने कहा कि केंद्र सरकार ने स्वयं ही एक पैनल गठित किया है। 


दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने बुधवार को कहा कि ऑक्सीजन की कमी से देश में बहुत सारी मौतें हुईं। दिल्ली में भी ऐसा वाकया देखने को मिला। यह कहना एकदम गलत है कि ऑक्सीजन की कमी से कोई मौत नहीं हुई। अगर ऐसा नहीं हुआ होता तो अस्पताल हाईकोर्टों का दरवाजा क्यों खटखटाते। केंद्र सरकार तो यह भी कह सकती है कि देश में कोई महामारी आई ही नहीं। 


भारत में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ऑक्सीजन का भारी संकट कई राज्यों में सामने आया था. इसमें यूपी, दिल्ली भी शामिल थे. अस्पतालों में बेड औऱ ऑक्सीजन न मिलने से तमाम मरीजों ने दम तोड़ दिया. सोशल मीडिया पर बेहाल मरीजों और उनके मरीजों के वीडियो ने सबको झकझोर दिया. हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक इन मामलों की सुनवाई चली।