तालिबान एक इस्लामिक स्टेट चाहते हैं, वैसे ही ऐसे लोग भी हैं जो हिंदू राष्ट्र चाहते हैं: जावेद अख्तर

प्रसिद्ध शायर गीतकार व पूर्व संसद सदस्य जावेद अख्तर तालिबान से की भारत की तुलना

तालिबान एक इस्लामिक स्टेट चाहते हैं, वैसे ही ऐसे लोग भी हैं जो हिंदू राष्ट्र चाहते हैं: जावेद अख्तर

प्रसिद्ध शायर गीतकार व पूर्व संसद सदस्य जावेद अख्तर ने पिछले शुक्रवार को एक समाचार चैनल से बातचीत के दौरान तुलना की जैसे तालिबान एक इस्लामिक स्टेट चाहते हैं, वैसे ही ऐसे लोग भी हैं जो हिंदू राष्ट्र चाहते हैं। ये लोग एक ही मानसिकता के हैं - चाहे वह मुस्लिम, ईसाई, यहूदी या हिंदू हो,

हिंदू संस्कृति का बताया अपमान 

शिवसेना के मुखपत्र सामना ने सोमवार को प्रसिद्ध पटकथा लेखक और गीतकार जावेद अख्तर की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) की तुलना तालिबान से करने को लेकर आलोचना की और इसे हिंदू संस्कृति का अपमान बताया।

सभी एक जैसे है 

मराठी दैनिक में संपादकीय के रूप में प्रतिक्रिया भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुंबई के नेताओं द्वारा अख्तर से बिना शर्त माफी की मांग के एक दिन बाद आई है। उन्होंने कहा, "बेशक, तालिबान बर्बर है, क्रूर है और उनकी हरकतें निंदनीय हैं, लेकिन आरएसएस, विहिप और बजरंग दल का समर्थन करने वाले सभी एक जैसे हैं। 


तालिबान की तुलना से सहमत ने नहीं 

शिवसेना के मुखपत्र में कहा गया है कि अख्तर कट्टरवाद और कट्टरता के बारे में खुलकर बात करते रहे हैं, लेकिन हम आरएसएस और तालिबान के बीच तुलना से सहमत नहीं हैं क्यूंकि पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन जैसे देश में लोकतंत्र है ही नहीं लेकिन वे अफगानिस्तान में तालिबान का समर्थन कर रहे हैं क्योंकि इन देशों में मानवाधिकारों और लोकतंत्र का कोई स्थान नहीं है।  

भारत हर तरह सहनशील है 

लेकिन भारत एक लोकतांत्रिक देश है और एक व्यक्ति की स्वतंत्रता का सम्मान करता है। भारत हर तरह से बेहद सहनशील है इसलिए आरएसएस की तालिबान से तुलना करना गलत है। वही कहा गया है की ईरान देश में में खुमैनी का शासन था और अफगानिस्तान में अब तालिबान की हुकमत है। हिंदुत्व को इन दो नियमों से जोड़ना हिंदू संस्कृति के प्रति अपमानजनक है। 

हिंदुत्व एक "संस्कृति" है

संपादकीय में कहा गया है कि आरएसएस और वीएचपी जैसे संगठनों के लिए हिंदुत्व एक "संस्कृति" है। आरएसएस और वीएचपी चाहते हैं कि हिंदुओं के अधिकारों का दमन न किया जाए। इसके अलावा, उन्होंने कभी भी महिलाओं के अधिकारों पर कोई प्रतिबंध नहीं लगाया। हालांकि अफगानिस्तान की स्थिति भयावह है। लोग डर के मारे अपने देश से भाग गए और महिलाओं के अधिकारों को नियंत्रण किया जा रहा है।