कथनी और करनी में फर्क दिखा रहा है तालिबान, सरेआम महिलाओं की आज़ादी छीनी जा रही है

तालिबान अपनी पहचान बदलना चाहता है वो चाहता है की जब उसकी सरकार सत्ता में आए तो अन्य देशों से उनके रिश्ते अच्छे हो.

कथनी और करनी में फर्क दिखा रहा है  तालिबान, सरेआम  महिलाओं की आज़ादी छीनी जा रही है

तालिबान अपनी पहचान बदलना चाहता है वो चाहता है की जब उसकी सरकार सत्ता में आए तो अन्य देशों से उनके रिश्ते अच्छे हो. हालाकिं पकिस्तान और चीन तालिबान का पूरा समर्थन कर रहा है लेकिन तालिबान अभी भी अपना दोगलापन दिखा रहा है. तालिबान की कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर दिख रहा है वो कह तो कुछ और रहा है लेकिन कर कुछ और रहा है.


मैं एक भारतीय महिला हूँ लेकिन अफ़ग़ानिस्तान की उन लाखों महिलाओं का दर्द समझ सकती हूँ. जहाँ एक तरफ  बीबीसी को तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने हाल ही एक इंटरव्यू में यह कहा था की उनकी आने वाली सरकार महिलाओं को काम करने और पढाई करने का की आजादी देगी. फिर क्यों अफ़ग़ानिस्तान के स्कूल में लड़कियों के जाने पर रोक लगा दी. 


सिर्फ इतना ही नहीं तालिबान के एक प्रवक्ता ने कहा था की हमने अपने सैन्य दल को वॉयस नोट के जरिए निर्देश दिया है की वह जबरन किसी के घर में नहीं घुसेंगे ऐसा करने वालों को सख्त सजा देंगे लेकिन अभी वहां की तस्वीरें कुछ और बयां करती है. संयुक्त राष्ट्र के एक खुफिया दस्तावेज के अनुसार तालिबान घर-घर जाकर विरोधियों और उनके परिवारों की तलाश कर रहे हैं.


तालिबानों ने पहले महिलाओं को यह भी आश्वासन दिया था उनके अधिकारों का सम्मान किया जाएगा, और तालिबान अपने क्रूर 1996-2001 शासन से "सकारात्मक रूप से अलग" होगा. तो क्या वो महज कुछ झूठे शब्द थे फरेब था महिलाओं की आजादी को लेकर. एक हाई-प्रोफाइल महिला पत्रकार द्वारा सरकार द्वारा संचालित टेलीविजन स्टेशन के लिए इस सप्ताह ऑनलाइन पोस्ट किए गए एक वीडियो ने तालिबान की सहनशीलता की नई छवि को एक अलग वास्तविकता पेश की थी.

लेकिन अभी अफ़ग़ान की हजारों जनता अफ़ग़ान से भागने के फ़िराक में है अभी भी हजारों निकासी उड़ानों में सवार होकर राजधानी से भागने की कोशिश कर रहे हैं. एक  संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट जारी होने पर सामने आया है की अभी लोग वह डर के साये में बैठे है. वहां अभी तालिबान लोगों के घरों में घुस कर तलाशी ले रहे है. यहाँ तक रिपोर्ट में कहा गया है कि आतंकवादी काबुल हवाई अड्डे के रास्ते में भी लोगों की स्क्रीनिंग कर रहे थे. वहां के टेलीविज़न और संगीत पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है. 

वे उन लोगों के परिवारों को निशाना बना रहे हैं जो खुद को तालिबान के हवाले देने से इनकार करते हैं, और अपने परिवारों को 'शरिया कानून के अनुसार' मुकदमा चला रहे हैं और दंडित कर रहे हैं.तालिबान ने अतीत में इस तरह के आरोपों से इनकार किया है और कई बार बयान जारी कर कहा है कि तालिबान आतंकवादियों को निजी घरों में प्रवेश करने से रोक दिया गया था. वे इस बात पर भी जोर देते हैं कि महिलाओं और पत्रकारों को अपने नए नियम के तहत डरने की कोई बात नहीं है, हालांकि कई मीडियाकर्मियों ने हाल के दिनों में काबुल में देखी गई कुछ अराजकता को रिकॉर्ड करने की कोशिश में लाठी या चाबुक से पीटने की सूचना दी है.