अर्श से लेकर फर्श तक भारतीय युवा खिलाड़ी उनमुक्त चंद की कहानी

शोहरत कभी जिंदगी में आती तो जरूर है लेकिन शोहरत किसी की सगी नहीं होती है शोहरत का सफर फर्श से अर्श तक तो कभी अर्श से फर्श तक ही रहता है।

अर्श से लेकर फर्श तक भारतीय युवा खिलाड़ी उनमुक्त चंद की कहानी

शोहरत कभी जिंदगी में आती तो जरूर है लेकिन शोहरत किसी की सगी नहीं होती है शोहरत का सफर फर्श से अर्श तक तो कभी अर्श से फर्श तक ही रहता है। एक ऐसी शोहरत साल 2012 भारत के अंडर 19 विश्व-विजेता कप्तान उनमुक्त चंद को मिली थी। उस वक़्त उनमुक्त चंद भारत में प्रसिद्ध हो चुके थे। दिल्ली के मयूर विहार के नौजवान उनमुक्त को हर कोई भविष्य का सुपर स्टार मान चूका था। वही जब पत्रकार विमल कुमार उनमुक्त के घर इंटरव्यू लेने पहुंचे उस वक़्त पहले से ही वहां कई मीडिया मौजूद थी प्रिंट पत्रकार अलग और टेलीविज़न पत्रकारों की लाइन लग गई है। 

वक़्त से पहले ही गवानी पड़ी शोहरत 

उनमुक्त में इस शोहरत का कही ना कही घमंड आ चूका था। एक सीनियर पत्रकार के द्वारा जब उन्होंने उनमुक्त से बातचीत की उस दौरान पत्रकार में उनमुक्त का फ़ोन नंबर माँगा लेकिन उस शोहरत का जूनून था और जवाब भौचक्का कर देने वाला। उनमुक्त ने फ़ोन नंबर को लेकर कहा की आप मेरे एजेंट का नंबर ले लीजिए आगे से उन्हें ही संपर्क करिएगा किसी भी इंटरव्यू को लेकर। यह जवाब एक सीनियर पत्रकार के लिए हैरानी वाला था क्यूंकि उन्होंने कई मर्तबा भारतीय सुपर खिलाड़ी सचिन तेंदुलकर से लेकर अनिल कुंबले तक का इंटरव्यू लिया था। 


दिग्गजों ने वक्त रहते चेताया था

जवानी के जोश में उनमुक्त एक तरफ जहाँ दिल्ली के लिए रणजी ट्रॉफी खेलने लगे तो वही दूसरी तरफ उनमुक्त 
टीम इंडिया के लिए केवल सोचते थे और खुद का तुलना विराट कोहली से करते थे। खैर यह तो उनमुक्त दूर की सोच थी। वही उनमुक्त खेल की तरफ कम और मल्टीनेशनल कंपनियों के साथ विज्ञापन में करने में जुट गए। उनकी इस रवैये को देखकर तो दिग्गज खिलाड़ियों ने उन्हें चेतावनी दी थी। 


पूरी तरह से आ चुके थे बहकावे में 

उन्मुक्त आसमान की बुलंदियों को छूने को तैयार थे लेकिन अचानक वक़्त को कुछ और ही मंजूर हुआ और उन्मुक्त आईपीएल में असफल साबित हो गए और रणजी ट्रॉफी के प्रति उनका संगर्ष बढ़ गया। लेकिन उन्मुक्त फिर भी नहीं बदले और खेल की बजाय उन्होंने अपना पूरा फोकस ग्लैमर और मीडिया में छाए जाने पर ज्यादा रहा। फिर के वक़्त के जब उनका पाला दिग्गज खिलाड़ी कपिल देव से पड़ा तो उन्होंने उन्मुक्त को कहा था था की वक़्त रहते अपना ध्यान क्रिकेट पर देना चाहिए ना की ग्लैमर पर। लेकिन तब तक उन्मुक्त एजेंट सलाहकारों की चपेट में बुरी तरह फंस चुके थे और उनका करियर खत्म हो चूका था। 


आने वाले नए खिलाड़ियों के लिए यह एक सबक है। आपका बैकग्राउंड क्या है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता पर आप अपने खेल के प्रति कितने समझदार है यह मायने रखता है। छोटी सी शोहरत से कदम जल्दी जल्दी बढ़ाने के बजाय कदम आराम से और विचार के साथ रखना चाहिए। मल्टीनेशनल कम्पनिया, एजेंट नए खिलाड़ियों को ग्लैमर में उतार कर खुद के ब्रांड प्रमोशन करवाते है। और यही से शुरुआत हो जाती है भटकने की। 28 वर्षीय उन्मुक्त चंद बेहतरीन खिलाड़ी थे अच्छा बैकग्राउंड था लेकिन फिर आगे जाकर उन्मुक्त ने भारतीय क्रिकेट से अपना रिस्ता तोड़ लिया।