स्पीकिंग क्यूब ने आयोजित किया मानसिक बीमारियों से सम्बंधित कार्यक्रम, मैडिटेशन हो सकता है असरदार

मानसिक बीमारियों से जूझना अपने आप में एक गंभीर समस्या है आधी से ज्यादा संख्या में लोग मानसिक तनाव से जूझ रहे है

स्पीकिंग क्यूब ने आयोजित किया मानसिक बीमारियों से सम्बंधित कार्यक्रम, मैडिटेशन हो सकता है असरदार

मानसिक बीमारियों से जूझना अपने आप में एक गंभीर समस्या है आधी से ज्यादा संख्या में लोग मानसिक तनाव से जूझ रहे है। इसी मुद्दे को लेकर देहरादून में स्पीकिंग क्यूब संस्था की ओर से वर्चुअल माध्यम से एक कार्यक्रम आयोजित किया गया है। कार्यक्रम को स्पीकिंग क्यूब संस्था की कंसलटेंट  कॉउंसलर मीतू शारदा  ने वर्चुअल माध्यम से संचालित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी के विजिटिंग फैकल्टी लामा शांता नेगी ने प्रार्थना कर कार्यक्रम का आगाज किया। वर्चुअल कार्यक्रम आयोजन तीन दिनों तक चलेगा इसमें शामिल होने के लिए आप सभी भी जुड़ सकते है (जुड़ने के लिए क्लिक करें)

डॉ. दीपिका चमोली शाही, स्पीकिंग क्यूब मानसिक स्वास्थ्य परामर्श की संस्थापक और निदेशक ने संगठन के उद्देश्यों की शुरुआत की और गर्भवती महिलाओं और कैंसर रोगियों के मनोवैज्ञानिक मुद्दों से निपटने के लिए प्रमाणीकरण (certification) शुरू किया। सत्र की अध्यक्षता प्रो. डॉ रिता कुमार एडवाइजर स्पीकिंग क्यूब और सीनियर प्रोफेसर डिपार्टमेंट। मनोविज्ञान एआईपीएस, एमिटी नोएडा। डॉ. रीता कुमार ने सम्मेलन के विभिन्न उद्देश्यों पर चर्चा की।

 

दूसरे सलाहकार डॉ. कर्नल चेतन शारदा, डायबेटोलॉजिस्ट, एचओडी क्रिटिकल केयर ने चिकित्सा पद्धति में माइंडफुलनेस को एकीकृत करने पर अपने अनमोल शब्दों को साझा किया। उनके अनुसार रोगियों को मानसिक बिमारी या तनाव के दौरान आध्यात्मिकता को एकीकृत करना और सावधान रहना बहुत महत्वपूर्ण है। इसके बाद सलाहकार डॉ. चेतन शारदा ने हमारे मुख्य संरक्षक डॉ अनिल प्रकाश जोशी पद्म श्री और पद्म भूषण, संस्थापक हेस्को, ग्लोबल ग्रीन एक्टिविस्ट को मंच सौंप दिया जिसके बाद उन्होंने माइंडफुलनेस पर अपने विचार साझा किए। डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने जीवन शैली में बदलाव और पर्यावरण में बदलाव के बारे में चर्चा की जिसके कारण हमें दुख हुआ है। डॉ जोशी के अनुसार। माइंडफुलनेस ही एकमात्र तरीका है जिससे हम सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों का पोषण कर सकते हैं ।

विशिष्ट अतिथि एवम नव नालंदा महाविहार के कुलपति प्रो. डॉ. बैद्यनाथ लाभ ने दर्शकों को चित और चैतसिक की अवधारणा से अवगत कराया। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के डॉ. क्रिस्टोफर विलार्ड ने दिमागीपन की वैज्ञानिक व्याख्या साझा की। डॉ. क्रिस्टोफर के अनुसार महामारी के दौरान लोगों ने माइंडफुलनेस का अधिक अभ्यास करना शुरू कर दिया है। सीआईबीएस के प्रो. डॉ. लोबसंग भूटिया ने अपने विचार साझा किए कि कैसे ध्यान से खुशी मिलती है। उन्होंने इस तथ्य को समझाने के लिए बौद्ध धर्मग्रंथों से कहानियाँ सुनाईं।

उद्घाटन समारोह के मुख्य वक्ता, ILLM विश्वविद्यालय डायरेक्टर इमोशनल इंटेलिजेंस सेण्टर प्रो. डॉ. आभा सिंह ने सुझाव दिया की मनोविज्ञान बिना माइंडफुलनेस के कायम नहीं रह सकता है और व्यवहार में बदलाव लाने का एकमात्र तरीका ध्यान है यानी की मेडिटेशन। डॉ. कर्नल शेतन शारदा द्वारा पेश किए गए विभिन्न विषयों में माइंडफुलनेस पर एक पैनल चर्चा हुई और इसकी अध्यक्षता डॉ. चरण सिंह, पूर्व आरबीआई अध्यक्ष अर्थशास्त्र के प्रोफेसर, आईआईएमबी ने की। अन्य पैनलिस्ट डॉ. एम. टी. माशाम्बा, स्वास्थ्य विज्ञान के डीन स्कूल, वेंडा विश्वविद्यालय, दक्षिण अफ्रीका के रियर एडमिरल विनीत बख्शी थे।

डॉ. चरण सिंह ने अपना अनुभव साझा किया और अर्थव्यवस्था और आर्थिक व्यवहार में माइंडफुलनेस कैसे महत्वपूर्ण है, इस पर गहराई से विचार किया। रियर एडमिरल विनीत बख्शी, वी.एस.एम, ने सचेत अभ्यास के सशस्त्र बलों से वास्तविक समय की कहानियां सुनाईं। डॉ. माशंबा ने अफ्रीका में लैंगिक असमानता और इसे ध्यान से कैसे हल किया जा सकता है, इस पर चर्चा की। सलाहकार डॉ चेतन, डॉ रीता कुमार और संस्थापक डॉ दीपिका ने फिर पहले दिन के सत्र का समापन किया।