श्रावण माह से शुरू हो जाएगा 'हरेला' पर्व गाएं जाएंगे गीत

उत्तराखंड में गुरूवार से हरेला पर्व शुरू हो जाएगा उत्तराखंड में इस पर्व को परवर्तीय क्षेत्र के ग्रामीणजन बेहद धूमधाम से मनाते है।

श्रावण माह से शुरू हो जाएगा 'हरेला' पर्व गाएं जाएंगे गीत

उत्तराखंड में गुरूवार से हरेला पर्व शुरू हो जाएगा उत्तराखंड में इस पर्व को परवर्तीय क्षेत्र के ग्रामीणजन बेहद धूमधाम से मनाते है। वैसे इस पर्व को साल में तीन बार मनाया जाता है पहले चैत्र मास में, दूसरा श्रावण मास में,  आश्विन मास में, चैत्र व आश्विन मास में बोया जाने वाला हरेला मौसम के बदलाव के सूचक है।चैत्र मास में बोया/काटा जाने वाला हरेला गर्मी के आने की सूचना देता है, तो आश्विन मास की नवरात्रि में बोया जाने वाला हरेला सर्दी के आने की सूचना देता है।

इस पर्व में कुछ लोग पौधा रोपण भी करते है खासकर पीपल का पौधा। वही हरेला का शाब्दिक अर्थ हरियाली है। भले इस पर्व को लोग वर्ष में तीन बार मानते है लेकिन इसका विशेष महत्त्व श्रावण मास होता है क्यूंकि इस माह को हिन्दू मान्यतों के आधार पर बहुत ही पवित्र माना जाता है। इस पर्व के अवसर पर किसान पांच या सात पारकर के अनाज बोते है- जैसे धान, गेहूं, उड़द, गेहत, सरसों, भट्ट, आदि।

इस बोए हुए अनाजों की सेवा की जाती है और मनाते है की बोए गए पौधे जल्द बड़े हुए घने हो जाए। कहते है अनाजों के कुछ बीजों को भगवान का आशीर्वाद समझ कर घर के मुखिया के द्वारा परिजनों और बच्चों के सर और कान के पीछे रखा जाता है उन्हें टिका लगया जाता है। इस पर्व के दिन महिलाएं है चुड़िया पहनती है और साज शृंगार करती है। इस पर्व के दौरान हरेला गीत भी गाया जाता है। 

जी रये, जागि रये, तिष्टिये, पनपिये,
दुब जस हरी जड़ हो, ब्यर जस फइये,
हिमाल में ह्यूं छन तक,
गंग ज्यू में पांणि छन तक,
यो दिन और यो मास भेटनैं रये,
अगासाक चार उकाव, धरती चार चकाव है जये,
स्याव कस बुद्धि हो, स्यू जस पराण हो


वही इस अवसर पर सीएम धामी समस्त उत्तराखंड वासियों को हरेला की शुभकामनाएं दी। उन्होंने कहा भविष्य की चिंता को देखते हुए ‘एक व्यक्ति एक वृक्ष’ का हमें संकल्प लेना होगा। उन्होंने कहा कि पर्यावरण को किस प्रकार से हमें स्वस्थ व सुरक्षित रखना है, यह व्यापक स्तर पर पौधरोपण से ही संभव है।