स्मार्ट सिटी कार्य या धांधली सिटी कार्य टूटे फूटे दिखे बाजार के हाल

स्मार्ट सिटी कार्य के जोर शोर में क्यों है बाजार का बुरा हाल

स्मार्ट सिटी कार्य या धांधली सिटी कार्य टूटे फूटे दिखे बाजार के हाल

हर कार्य में खुद को अव्वल दर्जे पर देखने वाला उत्तराखंड का हाल सोमवार को देखने को मिला। स्मार्ट सिटी कार्य के दौरान महीनों पहले लगी टाइल्स टूटे फूटे हालातों में दिखे। अब इस हाल को देखकर यह साफ़ जाहिर होता है की उत्तराखंड सरकार केवल स्मार्ट सिटी के सपने बुन रही लेकिन कार्य में फिस्सडी साबित नजर आ रही है।  


वहीं हाल में देहरादून को सबसे तेज गति से कार्य करने पर बेस्ट स्मार्ट सिटी का अवार्ड दिया गया है। इंडिया स्मार्ट सिटी अवार्ड 2020 के लिए 100 स्मार्ट शहरों से आवेदन मांगे गए थे।  जिसमें देहरादून स्मार्ट सिटी ने भी प्रतिभाग किया गया था। लेकिन पल्टन मार्किट की हालत देखकर यही लगता है सरकार बेहतर कार्य करने से ज्यादा ऊपरी दिखवे में जी रही है। वहीं निकलने वाली टाइल्स को देखकर लगता है की कार्य तो तेज गति का है लेकिन मजबूती का नहीं। 


बाजार के हालात देख कर सिर्फ आमजन नहीं बल्कि बाजार के व्यापारी भी इस टूटे फूटे टाइल्स देखकर परेशान है। स्मार्ट सिटी के बारे पल्टन बाजार के कपडा व्यापारी मिथुन कश्यप ने बताया की पंद्रह दिन पहले लगी टाइल्स भी इतनी जल्दी टूट गई सरकार स्मार्ट सिटी कार्य बिल्कुल भी संतुष्ठ पूर्वक नहीं है ऐसे कार्य को स्मार्ट कार्य नहीं बल्कि धांधली कार्य कहना चाहिए। टूटे हुए टाइल्स को आकर बदल भी जाते है तो वो भी चार दिन से ज्यादा टिक नहीं पाती है। 

वहीं अन्य व्यापारियों का कहना है स्मार्ट सिटी कार्य लॉकडाउन के पहले से चल रहा है बाजार तो अब जाकर खुली है उसमे भी बाजार का हाल बहुत बुरा है। इस तरह का कार्य संतोषजनक नहीं है और न ही यह स्मार्ट सिटी कार्य की श्रेणी में आएगा। हालाकिं स्मार्ट कार्य का हाल बिल्कुल वैसा नजर आ रहा है जैसा हर पल में अपना कार्यकाल पूरा किए बैगेर उत्तराखंड की सरकार। करोड़ों की लागत का कार्य तो यही साबित कर रहा है की एक दिन दून निवासी स्मार्ट सिटी देखेंगे या मजाक सिटी।