सिर्फ हिन्दुस्तान की नहीं,लाखों पाकिस्तानियों की धड़कन है श्रीदेवी

वैन गॉग के बारे में अक्सर सुना होगा की जब उन्हें अपनी ही बनाई हुई पेंटिंग ज्यादा अच्छी लगने लगती थी तो उसे वह फाड़ देते थे ऐसा कुछ शायद श्री देवी के साथ हुआ था

सिर्फ हिन्दुस्तान की नहीं,लाखों पाकिस्तानियों की धड़कन है श्रीदेवी

वैन गॉग के बारे में अक्सर सुना होगा की जब उन्हें अपनी ही बनाई हुई पेंटिंग ज्यादा अच्छी लगने लगती थी तो उसे वह फाड़ देते थे ऐसा कुछ शायद श्रीदेवी के साथ हुआ था जब लाखों दिलों की धड़कन को ऊपर वाले ने एक दम बंद कर दिया था। श्रीदेवी भले इस जहाँ को अलविदा कह चुकी हो लेकिन आज भी श्रीदेवी अरबों लोगों के दिलों में जिन्दा है उन्हें भूलने की जरूत भला कौन कर सकता है। उनकी यह बाते शायद मैं आज इसलिए कर रही क्यूंकि कल उनका जन्मदिन मनाया जा रहा था। मुझे याद है जब मैंने पहली बार पड़ोसी के घर में चांदनी  देखी थी उनकी अदा उनका स्टाइल मेरी मेरी आँखों में रच रच के चढ़ गया था उस वक़्त फिल्मे आज के ज़माने की तरह मोबाइल पर ओटीटी प्लेटफार्म पर नहीं वीसीआर में देखी जाती थी। असल में श्रीदेवी को हिंदी नहीं आती थी लेकिन फिर भी पर्दे पर हिंदी अच्छी बोल लेती थी। 

पकिस्तान तक है फैन फोल्विंग 

1963 में जन्मी श्री अम्मा यंगर अय्यपन उर्फ़ श्री देवी ने सोलह साल की उम्र से अपने फ़िल्मी करियर की शुरुआत कर दी थी शायद गौर किया गया हो "जूली" फिल्म में श्री देवी बतौर चाइल्ड आरटिस्ट के रूम में नजर आई थी। श्रीदेवी ने तमाम फिल्मे की। जहाँ उन्होंने अनगिनत हिंदी फिल्मे की साथ ही उन्होंने कई तमिल और तेलगु फिल्मों में काम किया। उनकी फिल्मों के दीवाने सिर्फ हिन्दुस्तान में नहीं थे उनके लाखों दीवाने पकिस्तान में थे जो आज भी है। वहां एक हॉस्टल का वाक्या है जब तानाशाह जनरल ज़िया-उल-हक़ के समय में वीसीआर में फिल्मे देखना गैरकानूनी था लेकिन हॉस्टल के छात्र कहा मनने वाले छुप छुप के देखा जरूर करते थे। वही आज के समय की बात करे तो पकिस्तान के मशहूर अदाकारा आयेजा खान ने श्रीदेवी का लुक री-क्रिएट कर उन्हें याद किया था। पकिस्तान मुल्क के कई और हस्तियां है जो श्री देवी को आज भी याद करती है। उनकी आखिरी फिल्म "मॉम" में पकिस्तान के दिग्गज कलाकार अदनान सिद्दीकी और सजल अली के साथ काम किया था। 

चाहने वालों ने नहीं माना था सच 

श्रीदेवी की मौत मेरे लिए एक बुरे सपने की तरह थी मुझे याद है मैंने अपनी माँ के साथ "मॉम" पिक्चर हॉल में देखी थी। चौबीस फरवरी की सुबह मुझे मेरी माँ ने फ़ोन किया और कहा टीवी खोलो श्रीदेवी नहीं रही बहुत अटपटा लगा आँखे नींद से पूरी तरह से खुल नहीं पाई थी टीवी खोला न्यूज़ चैनल लगाया उसके बाद सोचने के लिए कुछ नहीं था मेरे पास वो मेरे द्वारा खोला हुआ टीवी तक तक चलता रहा जब तक उन्हें पंचतत्वलीन में नहीं देख लिया उनकी शव यात्रा देखकर लगा था की काश मैं भी इस भीड़ का हिस्सा होती दूरी बहुत थी। वही सोशल मीडिया पर जब उनकी मौत की खबर फ़ैल रही थी किसी को भी विश्वास नहीं हो रहा है जिसके बाद इस खबर को फेक बता दिया गया लेकिन बाद में श्रीदेवी के देवर संजय कपूर ने इस मीडिया के सामने जाहिर किया था की श्री देवी जी नहीं रही।