अधिकारियों के घरों व कार्यालयों की हुई तलाशी,आपत्तिजनक दस्तावेज, फर्जी बिल, लैपटॉप हुए जब्त

उत्तराखंड में कुंभ मेले के दौरान हुए फर्जी COVID-19 टेस्ट घोटाले के संबंध अधिकारियों के घरों और कार्यालयों की तलाशी ली

अधिकारियों के घरों व कार्यालयों की हुई तलाशी,आपत्तिजनक दस्तावेज, फर्जी बिल, लैपटॉप हुए जब्त

शुक्रवार को उत्तराखंड में कुंभ मेले के दौरान हुए फर्जी COVID-19 टेस्ट घोटाले के संबंध में कथित मनी लॉन्ड्रिंग के लिए पांच डायग्नोस्टिक फर्मों के शीर्ष अधिकारियों के घरों और कार्यालयों की तलाशी ली। उत्तराखंड पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने के बाद प्रवर्तन निदेशालय ने जांच शुरू की। इन प्रयोगशालाओं को उत्तराखंड सरकार द्वारा कुंभ मेले के दौरान रैपिड एंटीजन टेस्ट और आरटी-पीसीआर टेस्ट कराने का ठेका दिया गया था। उन्होंने कथित तौर पर आवश्यक संख्या में परीक्षण नहीं किए, लेकिन कोविड परीक्षण के लिए फर्जी प्रविष्टियां कीं और फर्जी बिल बनाए। 


यह बताते हुए कि इन प्रयोगशालाओं ने कथित तौर पर धोखाधड़ी कैसे की, प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि उन्होंने कई लोगों के लिए एक ही मोबाइल नंबर, पते और फॉर्म का इस्तेमाल किया और वास्तव में किसी का परीक्षण किए बिना कोविड परीक्षण की संख्या को बढ़ा दिया। जांच एजेंसी ने कहा कि कोविड परीक्षण रिकॉर्ड में से कुछ नाम कुंभ मेले में भी नहीं गए हैं। इन प्रयोगशालाओं द्वारा झूठी नकारात्मक परीक्षण के कारण, उस समय हरिद्वार में सकारात्मकता दर 0.18 प्रतिशत दिखाई गई थी, जबकि वास्तविक 5.3 प्रतिशत थी।


प्रवर्तन निदेशालय ने कहा कि उसने आपत्तिजनक दस्तावेज, फर्जी बिल, लैपटॉप, मोबाइल फोन और संपत्ति के दस्तावेज जब्त किए हैं। जांच एजेंसी ने जिन कंपनियों पर छापा मारा उनमें नोवस पाथ लैब्स, डीएनए लैब्स, मैक्स कॉरपोरेट सर्विसेज, डॉ लाल चंदानी लैब्स और नलवा लैबोरेटरीज शामिल हैं। जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि देहरादून, हरिद्वार, दिल्ली, नोएडा और हिसार में उनके शीर्ष अधिकारियों के घरों की तलाशी ली गई। जांच एजेंसी ने बयान में कहा कि राज्य सरकार उन्हें पहले ही 3.4 करोड़ रुपये का आंशिक भुगतान कर चुकी है।