व्यापारियों के व्यापार पर आरटीपीसीआर की मार, शर्त के चलते हो रहा नुकसान

कोरोना की मार सह रहे व्यापारी दिन पर दिन निराश होते जा रहे है ,छूट मिलने के बावजूद व्यापारियों को किसी तरह का लाभ नहीं मिल रहा है।

व्यापारियों के व्यापार पर आरटीपीसीआर की मार, शर्त के चलते हो रहा नुकसान

कोरोना की मार सह रहे व्यापारी दिन पर दिन निराश होते जा रहे है। छूट मिलने के बावजूद व्यापारियों को किसी तरह का लाभ नहीं मिल रहा है। व्यापारियों के व्यापार पर सबसे ज्यादा गहरी चोट आरटीपीसीआर रिपोर्ट मार रही है। क्यूंकि इसकी वजह से आधे से ज्यादा पर्यटक आने से परहेज कर रहे है तो भला व्यापारियों को छूट मिलने का क्या फायदा हो रहा है। वहीं राज्य में इस संकट की घडी में छोटे व्यापारियों को रोटी के लाले पड़ चुके है वहीं दूसरी तरफ बड़े व्यापारियों को भी नुकसान का सामना ही करना पड़ रहा है। आरटीपीसीआर जांच की अनिवार्यता और मशहूर टूरिस्ट प्वाइंट्स बंद है जिसके चलते व्यपारियों की मांग है की पूरे प्रदेश के पर्यटन स्थल पड़ोसी राज्य हिमाचल और उत्तर प्रदेश की तर्ज पर खोले जाएं। 

कोरोना का ग्राफ निचे आते ही राज्य में छूट का सिलसिला चल पड़ा जिसके चलते होटल्स और रेस्टोरेंट खुल पड़े लेकिन बाहरी राज्य से आने वालों के लिए आरटीपीसीआर की रिपोर्ट की शर्त रखी गई। व्यापरियों का मानना है की इस शर्त से उन्हें किसी तरह का लाभ नहीं मिल रहा है। उधर, हिमाचल ने कोविड जांच की निगेटिव की रिपोर्ट की शर्त हटा दी। नतीजा यह है कि पड़ोसी राज्य के पर्यटक स्थल शिमला, मनाली, डलहौजी, धर्मशाला में सैलानियों की भीड़ उमड़ रही है। उत्तराखंड में सन्नाटा है।


पडोसी राज्य की बात की जाए तो उत्तर प्रदेश में ताजमहल, राजधानी दिल्ली और हिमचाल प्रदेश को पूर्ण रूप से खोल दिया गया है लेकिन उत्तराखंड के अधिकांश पर्यटक स्थल अभी बंद पड़े हुए है। मसूरी का कैंपटी फॉल, कंपनी गार्डन, देहरादून में एफआईआर, सहस्त्रधारा, गुच्चु पानी व अन्य सैरगाहों में अब भी रोक-टोक है। हालाकिं कोविड कर्फ्यू के चलते पांच दिन तक बाजार खुलने की अनुमति दी है इसके आलावा शनिवार और रविवार को बंदी लेकिन सैरगाहों को खासखर वीकेंड पर ही घूमने का मौका मिलता है और ऐसे दिन में बाजार बंद रखा जाता है। 

शासकीय प्रवक्ता सुबोध उनियाल का कहना है की ग्रामीण क्षेत्रों की सैरगाहों में कोई पाबंदी नहीं हैं। वहां जिलाधिकारी को फैसला लेने के अधिकार दिए गए हैं। प्रदेश सरकार चरणबद्ध ढंग से अनलॉक की ओर जा रही है। कोरोना की दूसरी लहर में हिमाचल राज्य कोरोना से उत्तराखंड जितना प्रभावित नहीं रहा। हमारे लिए लोगों के जीवन सुरक्षा सबसे ज्यादा जरूरी है। सरकार को सैकड़ों करोड़ के राजस्व की हानि हुई है। पर्यटन व्यवसाय को भारी नुकसान पहुंचा है। इससे नुकसान उबरने के लिए सरकार हर संभव सहयोग कर रही है।