30 वर्ग मीटर से छोटे प्लॉट पर भी आवासीय भवन बना सकेंगे उत्तराखंड के प्रदेशवासी

उत्तराखंड प्रदेश रहने वालों के लिए अब एक और सुनेहरा मौका हाथ लगा है।

30 वर्ग मीटर से छोटे प्लॉट पर भी आवासीय भवन बना सकेंगे उत्तराखंड के प्रदेशवासी

उत्तराखंड प्रदेश रहने वालों के लिए अब एक और सुनेहरा मौका हाथ लगा है। प्रदेशवासी जल्द ही 30 वर्ग मीटर से छोटे प्लॉट पर भी आवासीय भवन बन सकेंगे। विकास प्राधिकरणों में छोटे प्लॉटों पर भी आवासीय नक्शे पास किए जा सकेंगे। इसको लेकर एमडीडीए में परीक्षण की प्रक्रिया चल रही है। सूत्रों के अनुसार सरकार के स्तर से प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है फिलहाल इसे अनुमति के लिए शासन को इसका प्रस्ताव भेजा जाएगा।शासन को इसका प्रस्ताव भेजा जाएगा।संभावना है की इस पर तुरंत फैसला हो सकता है। 

प्रदेशभर में 30 वर्ग मीटर क्षेत्रफल यानी इतने छोटे प्लॉट पर मकान बनाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ता है क्यूंकि इतने छोटे क्षेत्रफल के लिए जल्द नक्शा पास नहीं होता। ऐसे में मकान बनाने की इच्छा रखने वालों को परेशानी उठानी पड़ती है।प्रदेश में ज्यादातर आवासीय जमीन तेजी से घट रही है। एक ओर जमीनों के दाम आसमान छू रहे है जो की एक आम इंसान या कम बजट वालों के लिए महंगे प्लॉट खरीदना आसान नहीं है क्यूंकि कोरोना के बाद किसी के भी हालात पहले जैसे नहीं रहे। ऐसे लोग छोटे प्लॉट खरीद रहे है। लेकिन मौजूदा बिल्डिंग बायलॉज के प्रावधानों के अनुसार इस पर वैध निर्माण नहीं किया जा सकता। लोगों की इस दिक्कत को देखते हुए न्यूनतम प्लॉट साइज में कमी करने की तैयारी चल रही है। एमडीडीए के विशेषज्ञों की टीम इसका परीक्षण कर रही है। जल्द ही परीक्षण की रिपोर्ट तैयार कर प्रस्ताव के साथ शासन को भेजी जाएगी। 


पहाड़ी क्षेत्रों में सबसे ज्यादा छोटे प्लॉट 

जमीनों का सबसे ज्यादा संकट पहाड़ी इलाकों में है, जहां ज्यादातर छोटे प्लॉट हैं। ऊबड़-खाबड़ और ढलान वाले इलाकों में मकान के लिए बड़ा प्लॉट ढूंढना या तैयार कर पाना खासा मुश्किल होता है। ऐसे में वहां लोग बिना नक्शा पास कराए ही निर्माण कर रहे हैं। हालांकि, क्षेत्रफल कम होने पर लोग वैध निर्माण कर सकेंगे। छोटे प्लॉट पर नक्शा पास इसलिए नहीं हो सकता, क्योंकि वहां सेट बैक यानी खाली जगह नहीं छोड़ी जा सकती। बिल्डिंग बायलॉज के प्रावधानों के अनुसार भवन निर्माण के दौरान फ्रंट और बैक सेट बैक छोड़ना अनिवार्य है।


छोटे प्लॉट में तीन साइड सेट बैक छोड़े बिना निर्माण किए जा सकते हैं। हालांकि वहां भी फ्रंट सेट बैक और रोड बाइंडिंग छोड़ने की अनिवार्यता है। ऐसे में प्लॉट का बड़ा हिस्सा छूट जाता है। इसको देखते हुए ही न्यूनतम क्षेत्रफल में कमी की जा रही है। एमडीडीए के उपाध्यक्ष बृजेश कुमार संत का कहना है की इस फैसले से उत्तराखंड के प्रदेश के लाखों लोगों को फायदा मिलेगा। जिन लोगों के पास छोटा प्लॉट है, वो भी अपना आवासीय भवन बनवा सकेंगे। हम इसका परीक्षण कर प्रस्ताव शासन को भेजेंगे।