दुलर्भ प्रजाति की पाई गई सफ़ेद बुलबुल

उत्तराखंड में एक बाद एक दुलर्भ व लुप्त प्रजाति के पक्षी और जीव जंतु पाए गए है वहीं इस बार सफेद हिमालयन बुलबुल भी दिखाई दी है

दुलर्भ प्रजाति की पाई गई सफ़ेद बुलबुल

उत्तराखंड में एक बाद एक दुलर्भ व लुप्त प्रजाति के पक्षी और जीव जंतु पाए गए है. वहीं इस बार कोरल स्नेक के बाद अब सफेद हिमालयन बुलबुल भी दिखाई दी है. यह सफ़ेद हिमालयन बुलबुल कार्बेट के ढेला ज़ोन में दिखाई दी है विशेषज्ञओं की माने तो पाई गई बुलबुल नाम एल्बिनो बताया गया है. हालाकिं आमतौर बुलबुल का रंग पीला या सांवला देखा गया है लेकिन इस बार उत्तराखंड में सफ़ेद बुलबुल पाई गई है.

भारतीय वन्य जीव संस्थान के डायरेक्टर और पक्षी विशेषज्ञ धनंजय मोहन कहते हैं कि भारत में ऐसा ही केस सालों पहले मोर में भी देखने को मिला था. कई साल पहले इन मोरों को जू में लाकर साइंटिस्टों ने संरक्षित करने की भी कोशिश की थी.सफेद बुलबुल के बारे में कार्बेट पार्क के डायरेक्टर राहुल ने कहा कि ऐसा जेनेटिक म्यूटेशन के कारण होता है. ऐसे जीव दुर्लभ ही देखने को मिलते हैं. इस तरह का म्यूटेशन अन्य जानवरों में भी दिखाई देता है. 


कार्बेट के ढेला ज़ोन में गाइड सचिन चौहान ने बताया की वह पर्यटकों को जब वो जंगल में सफारी कराने ले गए तब उस वक़्त उनकी नजर सफ़ेद बुलबुल पर पड़ी जिसकी उन्होंने तत्काल तस्वीर अपने कैमरे में कैद कर ली. कार्बेट में हिमालयन बुलबुल की छह प्रजातियां पाई जाती हैं. हमेशा जोड़े में रहना पसंद करने वाले इस पक्षी का व्यवहार मिलनसार माना जाता है. इसकी लंबाई करीब 18 सेंटीमीटर और वजन तीस ग्राम के आसपास होता है.


राहुल ने म्यूटेशन के बारे में बताते हुए कहा कि इन मोरों में जब मेटिंग कराई गई, तो कुछ के अंडों से तो सामान्य बच्चे पैदा हुए लेकिन कुछ में सफेद मोर भी पैदा हुए. मोहन का कहना है कि ये म्यूटेशन के कारण होता है, ऐसे पक्षी लंबे समय तक सर्वाइव भी नहीं कर पाते. वही इससे पहले उत्तराखंड में दुलर्भ प्रजति की छिपकली पाई गई थी.