डेथ ऑडिट को बताया भ्रमित सरकार की व्यवस्थाओं पर उठाया सवाल: नैनीताल हाईकोर्ट

आने वाली तीसरी लहर को लेकर उत्तराखंड की तैयारियों से नैनीताल हाईकोर्ट हुआ नाखुश

डेथ ऑडिट को बताया भ्रमित सरकार की व्यवस्थाओं पर उठाया सवाल: नैनीताल हाईकोर्ट

उत्तराखंड सरकार में आने वाली तीसरी लहर के लिए जो तैयारियां की उससे नैनीताल हाईकोर्ट नाखुश है। वहीं हाई कोर्ट ने डेथ ऑडिट को  भ्रमित बताते हुए कहा अधिक मौते हार्टअटैक, या अन्य कारणों से हुई है। कोरोना की दूसरी लहर से कितनी मौते हुई है इस पर उत्तराखंड सरकार ने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। कोर्ट ने कहा कि सरकार द्वारा कराई गई डेथ ऑडिट रिपोर्ट में बड़ी गड़बड़ी है, जिसे कोर्ट स्वीकार नहीं करती है. लिहाजा स्वास्थ्य सचिव पूरे मामले पर अपना विस्तृत जवाब दोबारा पेश करें। 

सरकार की व्यवस्थाओं पर उठाया सवाल 

हाईकोर्ट तीसरी लहर पर क्या क्या व्यवस्था है इस पर हाई कोर्ट ने जानकारी ली कोर्ट ने पूछा है कि राज्य में कुल ऐसे कितन गांव हैं जहां सड़क नहीं हैं और ये गांव रोड़ से कितनी दूरी पर हैं। कोर्ट ने 108 व स्वास्थ्य विभाग के एंबुलेंस का ब्यौरा भी तलब करते हुए इनका तैनाती स्थल पूछा है। वहीं कोर्ट ने पूछा है कि तीसरी लहर के लिए बाल रोग विशेषज्ञों की जो हाई पॉवर कमेटी बनाई गई थी और उसने अपनी रिपोर्ट में जो संस्तुतियां दी हैं उनके अनुपालन का क्या स्टेटस है. राज्य में बच्चों के लिए कुल कितने वार्ड कितने अस्पतालों में हैं और उन में कितने पीडियाट्रिक बेड हैं। 

मुख्य सचिव ओमप्रकाश को लगाई फटकार 

कोरोना की तीसरी लहर के लिए उचित व्यवस्था ना होने के मामले पर न्यायाधीश की खंडपीठ ने नाराजगी व्यक्त की कोर्ट ने मुख्य सचिव ओम प्रकाश को फटकार लगाते हुए सभी व्यवस्था दुरुस्त करने को कहा है। कोर्ट ने प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव से पूछा है कि उत्तराखंड के सभी जिला अस्पतालों में कितने चाइल्ड स्पेशलिस्ट डॉक्टर हैं? कितने वेंटिलेटर हैं? कितना स्टाफ है? पीएचसी और सीएचसी में ब्लैक फंगस और तीसरी लहर के लिए क्या व्यवस्था की गई है? सभी पीएचसी और सीएचसी में कितनी एंबुलेंस की व्यवस्था की गई है?इसके अलावा कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा कि अब तक छोटे बच्चों के लिए कितने वॉर्ड तैयार किए गए हैं? हाईकोर्ट द्वारा बनाई गई हाई पावर कमेटी ने जो संस्तुति थी, उनका पालन किया जा रहा है या नहीं? अगर तीसरी लहर के दौरान डॉक्टरों की उत्तराखंड में कमी होती है तो सुरक्षा बल और सेना आदि के डॉक्टरों की सेवा लेने पर भी राज्य सरकार अभी से विचार करे। 

चारधाम यात्रा पर की टिप्पणी 

वहीं उत्तराखंड में अब तक ब्लैक फंगस की दवा उपलब्ध न होने पर हाईकोर्ट ने नारजगी जताई। वहीं कोर्ट ने प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव और अपर सचिव पर्यटन को अगली सुनवाई के दौरान वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के द्वारा हाईकोर्ट में पेश होकर अपना जवाब पेश करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने उत्तराखंड में 1 जुलाई से शुरू होने जा रही चारधाम यात्रा के मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि उत्तराखंड सरकार 1 जुलाई से प्रदेश में चारधाम यात्रा शुरू करवाने जा रही है. चारधाम यात्रा में देश-विदेश से लाखों की संख्या में भक्त आएंगे, लेकिन राज्य सरकार की व्यवस्थाओं को देखकर नहीं लगता की उत्तराखंड चारधाम जैसी बड़ी यात्रा के लिए तैयार है।