देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के खिलाफ विरोध जारी, सर के बल खड़े हुए तीर्थपुरोहित

देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड अधिनियम के खिलाफ आंदोलन की रणनीति बनाने के लिए तीर्थ पुरोहितों ने यमुना कॉलोनी में राज्य के मंत्रियों के आवास के बाहर धरना शुरू कर दिया है

देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के खिलाफ विरोध जारी, सर के बल खड़े हुए तीर्थपुरोहित

चार धाम पुजारी संघ की कोर कमेटी की बैठक के एक दिन बाद चार धाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड अधिनियम के खिलाफ आंदोलन की रणनीति बनाने के लिए तीर्थ पुरोहितों ने यमुना कॉलोनी में राज्य के मंत्रियों के आवास के बाहर धरना शुरू कर दिया है। देहरादून में यमुना कॉलोनी वे उस अधिनियम को वापस लेने की मांग कर रहे हैं, जिसके तहत चार धाम सहित 50 से अधिक मंदिरों को राज्य सरकार के नियंत्रण में लाया गया है। चार धाम तीर्थ पुरोहित हक हकूकधारी महापंचायत के प्रवक्ता बृजेश सती ने कहा, ''जब तक कानून वापस नहीं लिया जाता तब तक हम लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करते रहेंगे। 

अधिनियम तैयार करने से पहले हमारी राय नहीं मांगी गई

सचिवालय के लिए गांधी पार्क में प्रद्रशन कर रहे सती ने कहा है की 27 नवंबर को हम लखनऊ में एक रैली करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर 30 नवंबर तक अधिनियम को वापस नहीं लिया गया तो विरोध तेज हो जाएगा। सती ने कहा, "अधिनियम तैयार होने से पहले हमारी राय नहीं मांगी गई थी, इसलिए इसका हमारे लिए कोई मतलब नहीं है। चार धाम के पुजारी दिसंबर 2019 से इस मुद्दे पर सरकार के साथ आमने-सामने हैं, जब राज्य विधानसभा में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के भारी विरोध के बीच अधिनियम पारित किया गया था। 

अधिनियम की छतरी से उतरे छोटे मंदिर 

मुख्यमंत्री के रूप में अपने संक्षिप्त कार्यकाल के दौरान, तीरथ सिंह रावत ने अधिनियम की छतरी के नीचे से कई छोटे मंदिरों को हटा दिया। उन्होंने यह भी कहा था कि बोर्ड के फैसले की समीक्षा की जाएगी। इसके बाद, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 15 जुलाई को उत्तरकाशी की अपनी यात्रा के दौरान अधिनियम की समीक्षा की घोषणा की। इस मामले को देखने और बदलाव की सिफारिश करने के लिए 15 अगस्त को पूर्व राज्यसभा सांसद मनोहर कांत ध्यानी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया गया था। गढ़वाल क्षेत्र की 17 विधानसभा सीटों पर चार धाम के पुजारियों की अच्छी खासी आबादी है।