अफगानिस्तान में फंसे उत्तराखंड के लोग जल्द ही अपने घरों को सुरक्षित लौटेंगे: सीएम धामी

तालिबान ने अफगानिस्तान में सत्ता हासिल कर चुके है और वहां की दहशत के चलते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार 18 अगस्त को दिया आश्वासन

अफगानिस्तान में फंसे उत्तराखंड के लोग जल्द ही अपने घरों को सुरक्षित लौटेंगे: सीएम धामी

तालिबान ने अफगानिस्तान में सत्ता हासिल कर चुके है और वहां की दहशत के चलते मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बुधवार 18 अगस्त को आश्वासन दिया कि उत्तराखंड सरकार अफगान राष्ट्र में फंसे लोगों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास कर रही है। पीटीआई ने धामी के हवाले से कहा, "अफगानिस्तान में फंसे उत्तराखंड के लोग जल्द ही अपने घरों को सुरक्षित लौट आएंगे.

लगातार केंद्र के संपर्क में है 

सीएम ने कहा कि उनकी सरकार राज्य में फंसे लोगों को निकालने के लिए लगातार केंद्र के संपर्क में हैं। यह सुनिश्चित करने के लिए सभी कदम उठा रहा है कि अफगानिस्तान में फंसे प्रत्येक भारतीय सुरक्षित घर वापस आ जाए, "उत्तराखंड के सीएम ने कहा। आजीविका कमाने के लिए राज्य से अफगानिस्तान गए कई लोगों के वहां फंसे होने की आशंका है। अफगानिस्तान में तालिबानियों का कब्जा होने के बाद हजारों भारतीय अफगानिस्तान में फंस गए हैं। इनमें दून के भी तीन सौ से अधिक लोग शामिल हैं जो चार दिन से एक जगह पर हैं लेकिन उन्हें एयरपोर्ट जाने का रास्ता नहीं मिल पा रहा है। इनमें से कुछ लोग वीडियो जारी कर भारत सरकार ने लगातार मदद की गुहार लगा रहे हैं। इधर उनके परिजनों की सांसें अटकी हुई हैं। वे उनकी सलामती और सुरक्षित वापसी के लिए लगातार प्रार्थना कर रहे हैं। अफगानिस्तान में फंसे दून के लोगों में ज्यादातर पूर्व सैनिक हैं जो वहां के यूरोपियन, ब्रिटिश एंबेसी सहित अन्य जगहों पर सुरक्षा में तैनात थे। दून गल्वाडी, अनारवाला, गजियावाला, डोईवाला, नेहरूग्राम सहित विभिन्न स्थानों में रह रहे उनके परिजन सोशल मीडिया पर उनके वीडियो देख हलाकान हो गए हैं। उनकी आंखों में आंसू हैं।

हर वक्त उनके कान और आंखें टीवी और फोन पर टिकी हुई है

हर वक्त उनके कान और आंखें टीवी और फोन पर टिकी हुई है। जिन लोगों के पति, भाई और अन्य रिस्तेदार अफगानिस्तान में फंसे हुए हैं, उनका कहना है कि मजबूरी में सभी लोग नौकरी के लिए अफगानिस्तान गए। अगर लोगों को भारत में ही अच्छी सैलरी और नौकरी मिलती तो उन्हें वहां जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। कहा कि भारत सरकार को अब इस बारे में सोचना चाहिए। काबुल में फंसे नेहरू ग्राम निवासी नरेंद्र के साथ ही इंद्रानगर गल्जवाड़ी निवासी श्याम ठकुरी ने वीडियो के जरिए परिजनों को बताया कि वह चार दिन से एक ही कैंप में फंसे हुए हैं। यहां 140 भारतीय एक ही कमरे में हैं। न तो उन्हें खाने को कुछ मिला है और न ही सो पाए हैं। बैठने और रहने की कोई व्यवस्था नहीं है। जिस कंपनी में वह काम करते थे, उसने उन्हें छोड़ दिया है। वह भारत सरकार से गुहार लगा रहे हैं कि वह सभी को यहां से सुरक्षित निकाल लें। उनकी पत्नी रुचि ठकुरी ने बताया कि मंगलवार दो बजे पति से बात हुई थी।

धामी ने की विदेश मंत्रालय से बात 

एक आधिकारिक बयान के अनुसार इससे पहले मंगलवार को, धामी ने विदेश मंत्रालय से बात कर लोगों की सुरक्षित वापसी के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है. काबुल हवाईअड्डे पर हजारों अफगान लोगों को देश से बाहर निकलने के लिए विमान में चढ़ने की कोशिश करते देखा गया। सैकड़ों लोग अमेरिकी विमानों के पास हवाईअड्डे पर बचाव की उम्मीद में इकट्ठा हो गए थे. अंतिम हताश प्रयास में, कुछ विमान रनवे से नीचे उतरते ही उस पर चढ़ गए। वहीं अपर मुख्य सचिव गृह आनंद बर्धन ने कहा अफगानिस्तान में फंसे उत्तराखंडियों को लेकर लगातार केंद्र सरकार के संपर्क हैं। अफगानिस्तान से वापसी की कार्रवाई भारत सरकार को ही करनी है। सरकार लगातार इस मामले में नजर बनाए हुए है। उनका प्रयास होगा कि अफगानिस्तान में फंसे सभी उत्तराखंडी सही सलामत वापस लौटे।

अफ़ग़ान भाई बहनों की मदद करनी चाहिए 

इस बीच, प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (18 अगस्त) को कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (सीसीएस) की बैठक की और कहा, "भारत को न केवल अपने नागरिकों की रक्षा करनी चाहिए, बल्कि हमें उन सिख और हिंदू अल्पसंख्यकों को भी शरण देनी चाहिए जो चाहते हैं भारत आने के लिए, और हमें अपने अफगान भाइयों और बहनों को भी हर संभव सहायता करनी चाहिए जो सहायता के लिए भारत की ओर देख रहे हैं