मुस्लिम समुदाय के लोगों ने किया विरोध प्रदर्शन, SC/ST एक्ट' की तर्ज पर बनाया जाए 'मुस्लिम एक्ट'

उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए और अल्पसंख्यक आबादी की सुरक्षा के लिए मुस्लिम समुदाय के लोगों ने किया विरोध प्रदर्शन

मुस्लिम समुदाय के लोगों ने किया विरोध प्रदर्शन, SC/ST एक्ट' की तर्ज पर बनाया जाए 'मुस्लिम एक्ट'

मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोगों ने रविवार को सरकार द्वारा उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए और अल्पसंख्यक आबादी की सुरक्षा के लिए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की तर्ज पर कानून बनाने की मांग करते हुए देहरादून में विरोध प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा धर्म परिवर्तन रैकेट चलाने के आरोप में मौलवी कलीम सिद्दीकी की गिरफ्तारी की आलोचना करते हुए प्रदर्शनकारियों ने दावा किया कि सरकार अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को परेशान करने के लिए इस तरह के अभियान चला रही है। 

गिरफ्तारी को बताया अवैध 

वही इस कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं में से एक, मुस्लिम सेवा संगठन के अध्यक्ष नईम कुरैशी ने मीडिया को बताया की, “कलीम सिद्दीकी की गिरफ्तारी अवैध है। संविधान का अनुच्छेद 25 नागरिकों को शांतिपूर्वक अपने धर्म का प्रचार करने की अनुमति देता है। लेकिन मुसलमानों और दलितों को अपने संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करने की अनुमति नहीं है। उन्होंने यह भी मांग की कि गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए।

अपमानजनक शब्दों पर मुक़दमा दर्ज करना चाहिए 

पूरे देश में गाय की हत्या पर रोक लगनी चाहिए लेकिन सरकार गोवा जैसे राज्यों और कुछ पूर्वोत्तर राज्यों में जहां भाजपा सत्ता में है, इसके सेवन पर रोक नहीं लगा रही है। यह एक दोहरा मापदंड है। कुरैशी ने कहा कि 'एससी/एसटी एक्ट' की तर्ज पर 'मुस्लिम एक्ट' बनाया जाना चाहिए और मुसलमानों के खिलाफ अपमानजनक गालियों का इस्तेमाल करने वालों पर मामला दर्ज किया जाना चाहिए। सभा को संबोधित करते हुए, 'शहर काज़ी' मोहम्मद अहमद कासमी ने कहा, "सरकार का कर्तव्य अपने प्रत्येक नागरिक के अधिकारों की रक्षा करना है। लेकिन मुसलमानों और दलितों के खिलाफ घृणा अपराध बढ़े हैं।