वट सवित्री के मौके पर शिक्षिकाओं ने पौधा रोपण कर लिया संकल्प

वट सावित्री पूजा के शुभ अवसर पर देहरदून की शिक्षिकाओं ने पौधा रोपण

वट सवित्री के मौके पर शिक्षिकाओं ने पौधा रोपण कर लिया संकल्प

आज वट सावित्री पूजा के शुभ अवसर पर देहरदून की शिक्षिकाओं ने पौधा रोपण कर पर्यावरण संरक्षण की ओर कदम बढ़ाने की पहल की है।शिक्षिकाओं का कहना है कि वट सावित्री व्रत को इस साल कुछ अलग अंदाज में मनाएंगी। अपने पति की लंबी उम्र की तो कामना करेंगी ही, पर्यावरण संरक्षण को भी कदम उठाएंगी। 


हर साल वट सावित्री दिन लगाएंगी वट पौधा 

विवाह के बाद से पति की लंबी उम्र के लिए वट सावित्री व्रत लेती हूं। इस बार पर्यावरण संरक्षण की ओर भी कदम बढ़ाने का प्रयास करूंगी। मैंने हर साल वट सावित्री के दिन एक वट का पौधा लगाने और उसकी देखभाल का संकल्प लिया है। भगवान से कोरोना महामारी की शांति और जनजीवन सामान्य करने की प्रार्थना भी करूंगी। विकास के नाम पर जिस तेजी से पर्यावरण का दोहन हो रहा है, उसके प्रति सचेत होने की जरूरत है।

                                                                                  (नारीशिल्प इंटर कॉलेज की पूर्व प्रधानाचार्या डॉ. कुसुम रानी नैथानी)
                                                        

कोरोना महामारी ने हमें ऑक्सीजन की कीमत बता दी है। अब भी नहीं संभले तो भविष्य में और बुरा प्रभाव हो सकता है। इस वट सावित्री पर मैंने और मेरी साथी शिक्षिकाओं ने स्कूल और पार्क में वट के पौधे रोपने और देखभाल का संकल्प लिया है। साथ ही अपनी कालोनी में रहने वाले दूसरे लोग को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक करने का प्रयास करेंगे।

                                                                                                (जीजीआइसी राजपुर रोड की प्रधानाचार्य प्रेमलता बौड़ाई)


                                                                                                            
क्या है वट सवित्री व्रत 

कहते है यह व्रत महिलाएं अपने पति की लम्बी आयु के लिए रखती है। वट सवित्री व्रत हर साल जेष्ठ के माह में मनाया जाता है पौराणिक कथाओं के अनुसार कहा जाता है सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाने के लिए सावित्री ने यमराज को प्राण वापस देने के लिए विवश कर दिया था। आज इस मौके पर महिलाएं व्रत संकल्प लेकर वट (बरगद) पर जल,फूल और मिठाई चढ़ा कर कच्चे सूत से वट के पेड़ को बांध कर वट की परिकर्मा करती है तथा महिलाएं एक समूह बना कर वट कथा सुनती है। और इस तरह से पूजा अर्चाना कर अखडं सौभाग्य वती का आशीर्वाद पाती है