कानून व्यवस्था पर नंबर वन फिर भी उत्तराखंड में लगभग 150 से ज्यादा बच्चे लापता

कानून व्यवस्था की नंबर वन पुलिस ने अब तक नहीं ढूंढ नहीं पाई150 से ज्यादा बच्चे लापता,राज्य की 27 महिलाएं अभी लापता

कानून व्यवस्था पर नंबर वन फिर भी उत्तराखंड में लगभग 150 से ज्यादा बच्चे लापता

देहरादून वैसे तो कानून व्यवस्था के मामले में प्रथम स्थान प्राप्त कर चूका है लेकिन 2021 की जनवरी से लगभग 150 से ज्यादा बच्चों के गुमशुदगी के मामले दर्ज है जिनमे से दून पुलिस अब तक इन गुमशुदा बच्चों को नहीं ढूंढ पाई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार गुमशुदगी के सबसे ज्यादा मामले कोरोना के दौरान किए गए है। पिछले 6 महीने की बात की जाए तो गुमशुदा होने वाले बच्चों की उम्र चौदह साल से भी कम है। 

इस मामले को लेकर एडीजी लॉ एंड आर्डर अभिनव कुमार बताते है की ज्यादातर कुछ बच्चों को ढूंढने में सफलता मिली है बाकि के कुछ गुमशुदा हुए अपनी मर्जी या तनाव के कारण घर छोड़ कर गए है। बता दे की पिछले 6 महीने में गुमशुदगी के आंकड़े तेजी से बढे है। अगर जिलों की बात की जाए तो राजधानी देहरादून,हरिद्वार,यूएसनगर बच्चों की गुमशुदगी के मामले में सबसे टॉप पर है। वहीं इस साल की मई 2021 में 101 बच्चों के गुमशुदगी के मामले दर्ज हुए हैं। 

वहीं दून मेडिकल कॉलेज में मनोचिकित्सक डॉक्टर जया नवानी का मानना है कि घर में कोविड काल के दौरान ज्यादा तनाव रहा और यही वजह है कि बच्चे भी मानसिक तौर पर ज्यादा प्रभावित हुए हैं, ऐसे में पेरेंट्स को अपने बच्चों पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है। अब तनाव की वजह से इस तरह के मामले सामने आना वाकई चौकाने वाला है, ऐसे में अपने घर परिवार में बच्चों की एक्टिविटी पर पेरेंट्स को खास ध्यान देने की जरूरत है, वरना ये आंकड़े बढ़ते देर नही लगेगी। 

हालाकिं इन बातों का साफ़ तौर पर यह मतलब निकलता है की अगर प्रदेश में ज्यादातर बच्चें गुमशुदा हो रहे है तो क्या इसके जिम्मेद्दार सिर्फ अविभावक है तो क्या गुमशुदा हुए बच्चों को ढूंढ़ने में प्रशासन की कोई जिम्मेदारी नहीं। वहीं महिलाओं की बात की जाए तो इस साल हरिद्वार से 35 महिलाएं गुमशुदा है जिनमे से अभी भी 27 महिलाएं मिसिंग है। आंकड़ों के मुताबिक 2020 से 250 से भी ज्यादा लोग गुमशुदा है।