UKSSSC पेपर लीक मामले में अब ED की एंट्री, बड़े साजिश की आ रही बू

इस मामले में जांच कर रही एसटीएफ ने अब बड़े खेल और तारों का खुलासा करने के लिए आरोपियों की अवैध संपत्तियों के दस्तावेज़ ईडी को भेजकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है.

UKSSSC पेपर लीक मामले में अब ED की एंट्री, बड़े साजिश की आ रही बू
उत्तराखंड में अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की भर्ती परीक्षा में हुए पेपर लीक मामले में अब ईडी की एंट्री होने जा रही है. इस मामले में जांच कर रही एसटीएफ ने अब बड़े खेल और तारों का खुलासा करने के लिए आरोपियों की अवैध संपत्तियों के दस्तावेज़ ईडी को भेजकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी की है.


इस मामले में ज़िला पंचायत सदस्य हाकम सिंह की गिरफ्तारी के बाद कुछ और नेताओं के नामों को लेकर चर्चा बनी हुई है और इस बीच ईडी की एंट्री के साथ ही मामला इतना पेचीदा लग रहा है कि उत्तराखंड क्रांति दल ने सीबीआई जांच की मांग तक कर डाली है.


यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में उत्तराखंड क्रांति दल ने सरकार से सीबीआई जांच के साथ ही सरकार से नकल की रोकथाम के लिए कड़ी सजा देने वाला कानून बनाने की भी मांग की है. यूकेडी नेता मोहित डिमरी ने कहा राज्य निर्माण से अब तक प्रदेश में होने वाली हर परीक्षा विवादों व धांधलियों की भेंट चढ़ रही है, लेकिन नकल माफिया गिरफ्त में नहीं आ रहा है. कड़े कानून की जरूरत है, साथ ही पेपर लीक मामले में कई बड़े लोग शामिल हो सकते हैं इसलिए इस मामले को सीबीआई को सौंप देना चाहिए.


क्यों हो रही है ईडी की एंट्री?
पेपर लीक मामले में आरोपी ज़िला पंचायत सदस्य हाकम सिंह की बड़ी संपत्तियों को लेकर खुलासे हुए हैं. उसे रिसाॅर्ट के साथ ही लग्ज़री गाड़ियों, सेब के बगीचों और अन्य महंगी प्राॅपर्टी का मालिक बताया जा रहा है. ऐसे में सवाल खड़े हो गए हैं कि पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली का नेक्सस आखिर कितना बड़ा है? इसमें कितनी बड़ी मछलियां शामिल हैं और आखिर यह पूरा माफिया कितनी रकम का हेरफेर कर रहा है? इन तमाम पहलुओं के बारे में सुराग के लिए अब ईडी की मदद ली जा रही है.


गौरतलब है कि एसटीएफ अब तक लगातार यही कह रही है कि हाकम सिंह की गिरफ्तारी के बाद और भी नेताओं के नाम इस केस में सामने आ रहे हैं, जिनसे पूछताछ की जा रही है और उनकी गिरफ्तारी भी की जा सकती है. आपको बता दें कि इस केस में अब तक डेढ़ दर्जन से ज़्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है लेकिन विपक्ष का आरोप अब भी यही है कि बड़ी मछलियों पर शिकंजा नहीं कसा जा रहा.