"नहीं दिया ऐसा कोई आदेश" , मुख्य सूचना आयुक्त ने ख़बरो का किया खंडन

लघु समाचार पत्र एसोसिएशन ने अनावश्यक सूचना मांगने वालों को चिन्हित करने का निर्देश देने संबंधी आदेश पर जताया विरोध ।

"नहीं दिया ऐसा कोई आदेश" , मुख्य सूचना आयुक्त ने ख़बरो का किया खंडन
मुख्य सूचना आयुक्त अनिल चन्द्र पुनेठा देहरादून में एक प्रतिनिधिमंडल से वार्ता करते हुए इस बात का खन्डन किया कि उनके द्वारा इस प्रकार का कोई निर्देश दिया गया है जिसमें अनावश्यक सूचना मांगने वालों को चिन्हित करने की बात कही गई हो।

लघु समाचार पत्र एसोसिएशन के बैनर तले एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार 23 जून को  मुख्य सूचना आयुक्त से मुलाक़ात की और उनको एक ज्ञापन सौंपा जिसमें “दैनिक जागरण, देहरादून मे 19/06/2022” प्रकाशित एक खबर के सम्बन्ध में विरोध जताया गया ।

कई समाचार पत्रों और 'न्यूज़ पोर्टल्स' ने कुछ दिन पहले मुख्य सूचना आयुक्त के चकराता दौरे के दौरान यह खबर प्रकाशित की थी की उन्होंने अनावश्यक सूचना मांगने वालों को चिन्हित करने का निर्देश दिया है।


खबरों के अनुसार चकराता में आयोजित एक कार्यक्रम में पहुंचे मुख्य सूचना आयुक्त ने कहा था की  अधिकारियों का दायित्व है कि सूचना मांगने वाले व्यक्ति को समय से सूचना उपलब्ध कराई जाए। अगर अधिकारी सूचना देने में लापरवाही बरतेंगे तो आयोग उन्हें दंडित करेगा। उन्होंने कहा था की यदि एक वर्ष तक किसी को सूचना उपलब्ध न कराई गई तो आयोग द्वारा फरियादी को मानसिक और अन्य क्षतिपूर्ति भी दिलाता है ।  मुख्य सूचना आयुक्त ने अधिकारियों को इसे गंभीरता से लेने की नसीहत दी थी साथ ही कहा था की कई लोग सूचना के अधिकार का दुरुपयोग कर रहे है अनावश्यक रूप से सूचना मांगने वाले इस प्रकार के लोगों पर भी सूचना आयोग नकेल भी कसता है। इसी विषय पर प्रतिनिधिमंडल ने विरोध प्रकट किया जिसके जवाब में मुख्य सूचना आयुक्त खबरों का खंडन किया।

अगर बात सूचना अधिकार अधिनियम कि की जाये तो इसमें इस तरह का कोई  प्रावधान नहीं है। सूचना अधिकार अधिनियम देश के प्रत्येक नागरिक को इच्छित सूचना मांगने का अधिकार देता है। अधिनियम की धारा 6(2) मे आवेदक से पता के सिवाय “कारण” जैसी जानकारी मांगने से प्रतिबंधित करता है।

मुख्य सूचना आयुक्त ने प्रतिनिधिमंडल से वार्ता मे स्पष्ट किया कि उनके द्वारा इस तरह का कोई निर्देश नहीं दिया गया है। बैठक मे कुछ अधिकारियों ने इस तरह की बात उठाई जरुर थी लेकिन उनके द्वारा ऐसा कोई निर्देश नहीं दिया गया है। यह खबर गलत तथ्यों पर प्रकाशित की गई है।

इस अवसर पर राज्य सूचना आयुक्त विपिन चन्द्र ने कहा कि अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार आवेदक से कारण, वजह, आवश्यकता जैसे तथ्य नहीं पूछे जा सकते हैं।

इस मौके पर प्रतिनिधिमंडल ने मांग की है कि आयोग के द्वारा दैनिक जागरण के सम्पादक को सही तथ्यों के उल्लेख के साथ पत्र भेजा जाए जिससे स्थिति को स्पष्ट किया जा सके। 

प्रतिनिधिमंडल में प्रमुख रूप से पत्रकार सुरेन्द्र अग्रवाल, बिजेंद्र कुमार यादव, प्रतीक पाठक सहित आधा दर्जन पत्रकार शामिल रहे।