Navratri Special 2022:- माँ पीताम्बरा शक्तिपीठ “जिन्होने कारगिल युद्ध में दिलाई थी विजय”

श्री पीताम्बरा पीठ मध्य प्रदेश के दतिया शहर में स्थित है। मंदिर देवी बगलामुखी को समर्पित है। मंदिर परिसर में देवी धूमावती की मूर्ति भी देखी जा सकती है।

Navratri Special 2022:- माँ पीताम्बरा शक्तिपीठ “जिन्होने कारगिल युद्ध में दिलाई थी विजय”

श्री पीताम्बरा पीठ मध्य प्रदेश के दतिया शहर में स्थित है। मंदिर देवी बगलामुखी को समर्पित है। मंदिर परिसर में देवी धूमावती की मूर्ति भी देखी जा सकती है। देवी धूमावती और बगलामुखी को महाविद्या माना जाता है।मंदिर परिसर में भगवान परशुराम, भगवान हनुमान, भगवान काल भैरव और विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। हरिद्रा झील मुख्य मंदिर के सामने स्थित है।

 

मंदिर परिसर में भगवान परशुराम, भगवान हनुमान, भगवान काल भैरव और विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित हैं। हरिद्रा झील मुख्य मंदिर के सामने स्थित है। मां पीतांबरा की जहां राजाशाही से लेकर नौकरशाह तक देवी की आराधना करने के लिए सात संमदर पार तक से आते हैं। मध्यप्रदेश के दतिया में स्थित माँ पीताम्बरा पीठ का मंदिर है। मान्यता है कि जब-जब देश पर संकट गहराया है, तब-तब माँ ने उस संकट को अपनी शक्ति से दूर किया है। यही वजह है कि यहां जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और अटल बिहारी वाजपेयी के साथ-साथ देश-विदेश की तमाम बड़ी हस्तियां मां के दरबार में पहुंचकर उनका आशीर्वाद लेती हैं।

 

माँ पीतांबरा शक्तिपीठ में मां बगलामुखी का रूप रक्षात्मक है और इन्हें राजसत्ता की देवी माना जाता है। इसी रूप में भक्त उनकी आराधना करते हैं। राजसत्ता से जुड़े नेता यहां आकर गुप्त रूप से पूजा करते हैं। पीतांबरा पीठ की शक्ति का अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि 1962 में चीन ने जब भारत पर हमला किया और दूसरे देशों ने सहयोग देने से मना कर दिया, उस समय के प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को किसी ने दतिया के पीतांबरा पीठ में यज्ञ करने की सलाह दी। उस समय पंडित नेहरू दतिया आए और देश की रक्षा के लिए पीतांबरा पीठ में 51 कुंडीय महायज्ञ कराया गया।

 

इस यज्ञ में कई अफसरों और फौजियों ने आहुति डाली, 11वें दिन अंतिम आहुति डालते ही चीन ने बार्डर से अपनी सेनाएं वापस बुला लीं। उस समय बनाई गई यज्ञशाला पीठ में आज भी मौजूद है। उसके बाद जब भी देश के ऊपर संकट आया है, तब गोपनीय रूप में पीतांबरा पीठ में साधना व यज्ञ का आयोजन होता है। केवल भारत-चीन युद्ध ही नहीं, बल्कि 1965 और 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान भी विशेष अनुष्ठान किया गया। कारगिल युद्ध के समय भी अटल बिहारी वाजपेयी की ओर पीठ में एक यज्ञ का आयोजन किया गया और आहुति के अंतिम दिन पाकिस्तान को पीछे हटना पड़ा।