तालिबानियों से मेरा पूरा परिवार डरा हुआ है, हम भारत से समर्थन का अनुरोध करते है: अफ़ग़ान नागरिक

अफ़ग़ान नागरिगों की स्थिति इस कदर दयनीय हो चुकी है की जितनी बार वहां के मौजूदा हालातों को जानकर मन ना सिर्फ विचलित होता है बल्कि उन डरे हुए नागरिकों के लिए एक बेचैनी होती है.

तालिबानियों से मेरा पूरा परिवार डरा हुआ है, हम भारत से समर्थन का अनुरोध करते है: अफ़ग़ान नागरिक

अफ़ग़ान नागरिगों की स्थिति इस कदर दयनीय हो चुकी है की जितनी बार वहां के मौजूदा हालातों को जानकर मन ना सिर्फ विचलित होता है बल्कि उन डरे हुए नागरिकों के लिए एक बेचैनी होती है. लेकिन फिर भी भारत सरकार व अन्य राष्ट्र उनकी मदद में जुटा हुआ है. यूँ तो तालिबान ने जिस दिन अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़ा किया है उस दिन तालिबान कहता कुछ है और कर कुछ और रहा है. ठीक बिल्कुल तरह जैसे बुधवार को जलालाबाद शहर में प्रदर्शनकारियों अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने के बाद उन्हें मौत की नींद सुला दी. इस प्रद्रशन में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई और अन्य १२ लोग घायल हो गए.

वापस आएंगे अशरफ 

वही पहले अपनी जनता को आतंकवादियों के बीच मरने के लिए छोड़ गए अशरफ गनी यूईए के आबूधाबी में शरण लिए बैठ गए. अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति अशरफ गनी और उनके परिवार को "मानवीय आधार" पर अमीरात में आश्रय दिया गया है। अफगानिस्तान से भागने के तीन दिन बाद गनी ने कहा कि वह स्वदेश लौटने के लिए बातचीत कर रहे हैं। अशरफ गनी ने कहा कि वह तालिबान और शीर्ष पूर्व अधिकारियों के बीच बातचीत का समर्थन करते हैं और इन आरोपों से इनकार करते हैं कि उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात भागने से पहले देश से बड़ी मात्रा में धन भर भर के लेकर गए थे.


रो रही है अफ़ग़ान की अवाम 

एक अफगान नागरिक सैयद अब्दुल्ला का कहना है ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने शरणार्थियों को स्वीकार करने और उन्हें आव्रजन वीजा देने की घोषणा की है। लेकिन यहां दूतावास हमें कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा है। मुझे नहीं पता कि क्या करना है। अब्दुल्ला ने बुधवार रात काबुल में खलील अल-रहमान हक्कानी और अन्य तालिबान सदस्यों से मुलाकात की. अफगानिस्तान के कई प्रांतों में देश के राष्ट्रीय ध्वज को लेकर अफ़गानों के सड़कों पर विरोध प्रदर्शन देखा गया, जो अब तालिबान द्वारा काबुल शहर पर कब्जा करने के बाद से उपयोग में नहीं है। अफगान मीडिया ने बताया कि पूर्वी प्रांतों नंगरहार, कुनार और खोस्त के निवासियों ने बुधवार को सार्वजनिक रूप से अफगान राष्ट्रीय ध्वज के तहत रैली की।


अपमान और झुकने पर एक कहानी ना बनने दे

अफगानिस्तान के कार्यवाहक राष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह ने कहा है की राष्ट्रों को कानून के शासन का सम्मान करना चाहिए, हिंसा का नहीं। अफगानिस्तान इतना बड़ा है कि पाकिस्तान निगल नहीं सकता और तालिबान के शासन के लिए बहुत बड़ा है। अपने इतिहास को आतंकवादी समूहों के अपमान और झुकने पर एक कहानी ना बनने दे. दिल्ली में अमेरिकी दूतावास के बाहर जमा हुए एक अफगान नागरिक का कहना है, "तालिबान के सत्ता में आने के बाद से मेरा परिवार डर गया है। हम भारत और अमेरिका से समर्थन का अनुरोध करते हैं। हमारे पास यहां कोई नौकरी नहीं है और वित्तीय संकट का सामना कर रहे हैं। 

हमने सुना है कि ऑस्ट्रेलियाई दूतावास अफगान नागरिकों को 3000 वीजा दे रहा है। जब हम यहां आए, तो उन्होंने हमें एक फॉर्म दिया, जिसमें कहा गया है कि हमें पहले यूएनएचसीआर को एक ईमेल भेजना होगा जो हमें वीजा के लिए दूतावास के पास भेजेगा। लेकिन UNHCR कार्यालय ने कोई जवाब नहीं दिया: दिल्ली में एक अफगान नागरिक