बच्ची को मुँह में दबा कर भागा था तेंदुआ, शिकारियों ने मार गिराया

उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणजन जंगली जानवरों के चलते दहसत में रहना पड़ रहा है।

बच्ची को मुँह में दबा कर भागा था तेंदुआ, शिकारियों ने मार गिराया

उत्तराखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले ग्रामीणजन जंगली जानवरों के चलते दहसत में रहना पड़ रहा है। क्यूंकि आए दिन तेंदुएं का साया उनके गांव के आसपास मंडराता रहता है रोजाना कोई ना कोई बच्चा तेंदुएं भूख का शिकार हो रहे है। जंगली जानवरों के बढ़ते कहर ने बीते सोमवार को रुद्रप्रयाग में एक तेंदुए को शिकारियों ने मार गिराया क्योंकि वह गांव से एक बच्चे को उठाकर भाग गया था। तीन शूटरों की टीम ने जब इस आदमखोर का शिकार किया तो आंकड़े ने कहा कि इस साल यह सातवां आदमखोर तेंदुआ रहा, जिसे मार गिराया गया।  बीते हफ्ते ही देवप्रयाग में एक आदमखोर गुलदार को शिकारियों ने ढेर किया था। 


हालफिलहाल जखोली तहसील के सिल्ला बहमन गांव में एक तेंदुआ शनिवार को एक डेढ़ साल की एक बच्ची को मुंह में दबाकर भाग गया था। वन विभाग की एक टीम ने इलाके का घेराव कर आदमखोर को तलाशने का अभियान शुरू किया।  दो दिन में जब इस तेंदुए का शिकार कर लिया गया तो एक तरफ गांवों वालों को राहत तो मिली, लेकिन उस बच्ची का कोई पता नहीं चला। 


आदमखोर तेंदुओं के हमले और वन विभाग द्वारा उन्हें मारे जाने के बारे में एक वन अधिकारी के हवाले से एक रिपोर्ट में बताया गया कि इस साल जो छह आदमखोर मारे गए, वो सभी किसी तरह अपंग थे। किसी के पंजे घायल हुए थे तो किसी के दांतों या जबड़ों में चोटें थीं। उत्तराखंड के वन विभाग के मुख्य वाइल्डलाइफ वॉर्डन जेएस सुहाग के अनुसार, 'इस तरह की अपंगताओं के चलते जानवर स्वाभाविक तौर पर शिकार नहीं कर पाते इसलिए बस्तियों का रुख करके आदमखोर हो जाते हैं।