"कोहिनूर" ना बेचा गया, ना खरीदा गया , जिसके भी पास रहा उसे किया बर्बाद

कोहिनूर एक ऐसा हीरा जिसे पाने की चाह हर राजा महाराजा के अंदर थी ।

"कोहिनूर" ना बेचा गया, ना खरीदा गया , जिसके भी पास रहा उसे किया बर्बाद

कोहिनूर एक ऐसा हीरा जिसे पाने की चाह हर राजा महाराजा के अंदर थी एक ऐसा हीरा जिसे आज तक ना तो बेचा गया और ना ही खरीदा गया मगर यह जिसके भी पास गया उसकी शान तो बड़ी लेकिन उसका अंत बहुत बुरा हुआ।

 

कोहिनूर हीरे का इतिहास-

कोहिनूर हीरे का इतिहास लगभग 5000 साल से भी पुराना है हीरे का वर्तमान नाम फारसी में है जिसका अर्थ है रोशनी का पहाड़।इतिहासकारों के अनुसार इसकी  खोज आंध्र प्रदेश के गुंटूर जिले में स्थित गोलकुंडा की खदानों में खुदाई के दौरान की गई थी, सबसे पहले इसे किसने देखा कब बाहर आया इसका इतिहास में भी कोई प्रमाण नहीं है बात करें इस हीरे की तो अपने इतिहास में यह हीरा पूरी दुनिया में घूम चुका है और कई शासकों के पास भी रहा है।

 

अब जानते हैं यही हीरा किन किन शासकों के पास रहा-

 आंध्र प्रदेश मि कोहिनूर हीरा मिलने के बाद यह काकतीय राजवंश कि शासन के अधीन रहा।उसके बाद दक्षिण भारत में अलाउद्दीन खिलजी द्वारा किए गए आक्रमण के बाद ऐसा माना जाता है कि खिलजी ने इसे जंग में जीता।जिसके बाद यह कोहिनूर हीरा दिल्ली सल्तनत के एक शासक से दूसरे शासक को मिलता रहा।

 
1526 में बाबर ने इब्राहिम लोदी को हराया और हीरा हासिल किया बाबर ने अपनी आत्मकथा बाबरनामा में हीरे का उल्लेख भी किया है।बाबर की पीढ़ी में यह हीरा हुमायूं हुमायूं के बाद अकबर अकबर के बाद शाह जहां तक रहा जिसके बाद शाहजहां ने इसे मयूर सिंहासन को सुशोभित करने में लगवाया।

 
जिसके बाद 1739 में मुगल साम्राज्य पर पारसी सम्राट नादिरशाह ने आक्रमण किया और हीरा प्राप्त किया इतिहास के अनुसार नादिरशा ही थे जिन्होंने हीरे को वर्तमान नाम “कोहिनूर” दिया जिसका फारसी में अर्थ होता है “रोशनी का पहाड़”

 

1747 में नादिर की हत्या के बाद उनका साम्राज्य पूरी तरह बिखर गया जिसके बाद इस हीरे को उनके सेनापति अहमद शाह दुर्रानी ने संभाल कर रखा फिर उनके वंशजों में से एक शाह शुजा दुर्रानी ने पंजाब के रणजीत सिंह को हीरा दिया जिसके बदले में दुर्रानी को अफगानिस्तान के सिंहासन को वापस जीतने में मदद मिली।

 

1849 में अंग्रेजों ने जब पंजाब पर आक्रमण किया तो उन्होंने विजय प्राप्त की और लाहौर संधि की घोषणा की गई इसके बाद लॉर्ड डलहौजी ने रणजीत  सिंह के उत्तराधिकारी दिलीप सिंह से महारानी विक्टोरिया को कोहिनूर भेंट करने की व्यवस्था की 1850 -51 में महारानी विक्टोरिया को कोहिनूर हीरा सौंप दिया गया तबसे कोहिनूर हीरा इंग्लैंड में ही है कहा जाता है कि कोहिनूर हीरे को वर्तमान में लंदन के टावर में सुरक्षित रखा गया है।

 

इस हीरे को लेकर कई बार बवाल भी हो चुका है इस हीरे पर कई देश अपना दावा कर चुके हैं पाकिस्तान, अफगानिस्तान कहता है कि यह हीरा उनका है उन्हें वापस कर दिया जाए वही भारत का कहना है कि कोहिनूर भारत की संपदा है कोहिनूर भारत के आंध्र प्रदेश में पाया गया था जिसे ब्रिटिश ने  गलत तरीके से लूट लिया वही ब्रिटिश सरकार कहती है कि कोहिनूर को रणजीत सिंह ने लाहौर शांति संधि के दौरान महारानी विक्टोरिया को दिया।भारतीय इतिहासकारों का कहना है कि भारत का इतिहास और भारत कोहिनूर के बिना अधूरा है।