जानिए महिलाओं की क्या स्थितियां होंगी अब तालिबान में, महिलाओं को लेकर क्या कहा तालिबान ने

इस्लामिक कंट्री में महिलाओं की स्थितियां अन्य देशों के मामले में बेहद बत्तर है ऐसे में तालिबान ने काबुल पर कब्ज़ा कर युवाओं और महिलाओं की चिंता बढ़ा दी है

जानिए महिलाओं की क्या स्थितियां होंगी अब तालिबान में, महिलाओं को लेकर क्या कहा तालिबान ने

इस्लामिक कंट्री में महिलाओं की स्थितियां अन्य देशों के मामले में बेहद बत्तर है ऐसे में तालिबान ने काबुल पर कब्ज़ा कर युवाओं और महिलाओं की चिंता बढ़ा दी है. क्यूंकि तालिबानियों के सत्ता में आने से महिलाओं की जिंदगियों में क्या असर पड़ने वाला है इसे लेकर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश से लेकर संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटरेश ने महिलाओं की स्थिति को लेकर चिंता जताई है. हालाकिं उन्होंने कहा है यह एक चिंता का विषय है.

महासचिव एंटोनियो गुटरेश ने जताई चिंता 

वही सोमवार को संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटरेश ने ट्वीट करके लिखा, "गंभीर रूप से मानवाधिकार उल्लंघन की ख़बरों के बीच अफ़ग़ानिस्तान में जारी संघर्ष हज़ारों लोगों को पलायन करने में मजबूर कर रहा है. सभी तरह के अत्याचार बंद चाहिए.अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानून और मानवाधिकारों, विशेष रूप से महिलाओं और लड़कियों के मामले में बहुत मेहनत के बाद जो कामयाबी हासिल की गई है. उसे संरक्षित किया जाना चाहिए.

तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने रखा अपना पक्ष 

इसी बीच तालिबान के प्रवक्ता सुहैल शाहीन ने दुनिया भर के विशेषज्ञों, नेताओं, और हस्तियों द्वारा तालिबानी शासन में महिलाओं के जीवन को लेकर जताई गई चिंताओं पर अपना पक्ष रखा है. उन्होंने बीबीसी को एक इंटरव्यू देते हुए कहा आने वाली सरकार महिलाओं को काम करने और पढाई करने का की आजादी देगी. जब महिलाओं के बारे में बीबीसी संवाददाता याल्दा हकीम ने उनसे पूछा की क्या पिछले दौर के तालिबानी शासन की अपेक्षा महिलाओं की स्थिति बेहतर होगी?लेकिन शहीन न्यायपालिका, शासन और सामाजिक व्यवस्था से जुड़े कई सवालों से बचते नजर आए.


महिलाओं के लिए सरकार करेगी फैसला 

हालाकिं इंटरव्यू जारी रहा इसके बाद याल्दा हकीम ने अपने सवालों को जारी रखते हुए पूछा क्या तालिबानी शासन में महिलाएं न्यायाधीश बन पाएंगी? जिसपर सुहैल शाहीन ने कहा की इसमें कोई दो राय नहीं है न्यायाधीश होंगे लेकिन महिलाओं को सहयोग देने का काम मिल सकता है लेकिन आगे यह सरकार फैसलों पर निर्भर करता है. इस पर याल्दा हकीम ने पूछा की क्या आगे सरकार तय करेगी की महिलाओं को काम करना है या नहीं.

क्या नब्बे दशक के जैसे हालात होंगे या कुछ नया होगा 

सुहैल शाहीन ने महिलाओं की शिक्षा और आजादी को लेकर कहा की पूर्ण रूप से महिलाओं की आजादी पर सरकार निर्णय करेगी की महिलाएं स्कूल जाएगी की नहीं यूनिफार्म होंगी की है नहीं.सरकार शिक्षा क्षेत्र के लिए काम करना होगा. इकोनॉमी और सरकार का बहुत सारा काम होगा.वही इसके बाद याल्दा हकीम ने पूछा की नब्बे के दशक में जैसे पहले महिलाओं के हालात थे की वह घर से अकेले बाहर नहीं जा सकती उन्हें सिर्फ अपने घर के पुरुषों यानि पिता,पति,भाई के साथ ही निकलने की इजाजत थी तो क्या नए शासन में भी महिलाओं के साथ यही होने वाला है. इस पर सुहैल शाहीन ने इंकार करते हुए कहा नहीं नहीं ऐसा नहीं होगा.महिलाएं इस्लामिक कानून के तहत सबकुछ कर सकती है. अगर अतीत की बात की जाए तो उस वक़्त महिलाओं को अकेले सड़कों पर चलते देखा जा सकता था. 


युवाओं को हमसे डरने की जरूरत नहीं है 

इसी के साथ याल्दा ने आखिरी सवाल पूछा की आप उन युवा लड़के लड़कियों से क्या कहना चाहेंगे जो आपकी वापसी से परेशान है. इस पर सुहैल शाहीन ने कहा की उन्हें हमारी सरकार से डरना नहीं चाहिए. उन्हें पिछली सरकार इ बेहतर स्थितियां मिलेंगी. उन्होंने कहा की हम उनकी इज्जत, सम्पत्ति, रोजगार और उनकी पढाई की रक्षा तैयार है.