शिवरात्रि पर जलाभिषेक के साथ संपन्न हुई कांवर यात्रा, इस बार कांवड़ यात्रा ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

कांवड़ यात्रा ने इस बार रिकाॅर्ड तोड़ दिया. दो सप्ताह के भीतर प्रदेश में करीब चार करोड़ कांवड़ियों ने गंगाजल भरा.

शिवरात्रि पर जलाभिषेक के साथ संपन्न हुई कांवर यात्रा, इस बार कांवड़ यात्रा ने तोड़े सारे रिकॉर्ड

गुरु पूर्णिमा के एक दिन बाद शुरू हुई श्रावण मास की कांवड़ यात्रा मंगलवार को शिवरात्रि को जलाभिषेक के साथ संपन्न हो गई। कांवड़ यात्रा ने इस बार रिकाॅर्ड तोड़ दिया. दो सप्ताह के भीतर प्रदेश में करीब चार करोड़ कांवड़ियों ने गंगाजल भरा. हरिद्वार में ही साढ़े तीन करोड़ से ज़्यादा कांवड़िए पहुंचे. इसके अलावा उत्तरकाशी ज़िले में गंगोत्री और गोमुख से भी गंगाजल लेने के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह देखा गया. मंगलवार को भी 30 लाख शिवभक्तों ने गंगाजल उठाया और अपने प्रदेशों के लिए रवाना हुए।

13 दिनों तक चली कांवड़ यात्रा के दौरान तीन करोड़ 80 लाख 70 हजार कांवड़ियों ने गंगाजल उठाया।  कांवड़ यात्रा के अंतिम दिन हरिद्वार में ही लाखों श्रद्धालु गंगाजल उठाने के लिए पहुंचे. हर की पैड़ी और अन्य घाटों पर भारी भीड़ दिखाई दी. मध्य प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश समेत अन्य राज्यों से बड़ी तादाद में कांवड़ियों का हुजूम उत्तराखंड में उमड़ा.

यात्रा के अंतिम दिन डीएम विनय शंकर पांडेय और एसएसपी डॉ. योगेंद्र सिंह रावत ने कांवड़ यात्रा सकुशल संपन्न होने पर ड्यूटी करने वाले अधिकारियों और कर्मियों को शाबाशी दी। 

 

कांवड़ यात्रा शुरू होने से पहेले ही शासन-प्रशासन ने करीब चार करोड़ कांवड़ियों के हरिद्वार पहुंचने की उम्मीद जताई थी। इसी हिसाब से सुविधाएं जुटाई गई थी। हाईवे से लेकर शहर में यातायात प्लान लागू किया गया। 

कांवड़ मेला के प्रभारी इंस्पेक्टर बीएल भारती ने यह जानकारी देते हुए यह भी कहा कि इस आंकड़े में इज़ाफा हो सकता है क्योंकि अंतिम दिन भी करीब 30 लाख श्रद्धालु पहुंचे. असल में, कांवड़ यात्रा का आयोजन इस साल दो साल बाद किया गया क्योंकि कोरोना संक्रमण के चलते 2020 और 2021 में यह यात्रा बाधित रही थी.

पैदल कांवड़ तक दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर यातायात व्यवस्था सामान्य रूप से सुचारु रही, लेकिन 20 जुलाई से डाक कांवडियों का आवागमन शुरू हो गया। 22 जुलाई से हाईवे के दोनों साइड कांवड़ियों का कब्जा रहा। दिन रात कांवड़ चलती रही और डीजे के शोर भी नहीं थमा। डाक कांवड़ के आखिरी तीन दिनों में हर तरफ कांवड़ियों का हुजूम रहा। बैरागी कैंप से लेकर हरकी पैड़ी एवं आसपास के घाटों और संपर्क मार्गों पर कांवड़िए ही नजर आए।

वीआईपी घाट पर पूरी तरह कांवड़ियों का कब्जा रहा। मंगलवार को शिवरात्रि के साथ कांवड़ यात्रा सकुशल संपन्न हो गई। इससे प्रशासन और पुलिस ने बड़ी राहत की सांस ली। बुधवार से बाहरी जिलों से मेला ड्यूटी पर आई पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की रवानगी शुरू हो जाएगी।