ससुर ने की बहु और बेटे की हत्या, नहीं है कोई पछतावा, कैदियों को सुनाता रहा भूत प्रेत की कहानी

उनकी उम्र और कांड सुनने के बाद कई शातिर भी सख्ती में हैं। वहां भी दीप तिवारी अन्य कैदियों को भूत-प्रेत की कहानियां सुनाते रहे। कहा कि उनकी बहू पर भूत का साया था

ससुर ने की बहु और बेटे की हत्या, नहीं है कोई पछतावा, कैदियों को सुनाता रहा भूत प्रेत की कहानी
बुधवार देर रात कानपूर में अपने बेटे और बहु के हत्यारे ससुर को पुलिस ने हिरासत में लेकर जेल भेज दिया। मामला कानपूर के रामबाग का है वही बहु का हत्यारा आरोपी दीप तिवारी का कहना है की मुझे अपने हत्याकांड कोई पछतावा नहीं है क्यूंकि वह अपनी बहु तंग आ गया था। दोहरे हत्याकांड के आरोपी दीप को जेल प्रशासन ने आइसोलेशन बैरक में रखा है। उनकी उम्र और कांड सुनने के बाद कई शातिर भी सख्ती में हैं। वहां भी दीप तिवारी अन्य कैदियों को भूत-प्रेत की कहानियां सुनाते रहे। कहा कि उनकी बहू पर भूत का साया था। वह रात में देर से उठती थी और रोने लगती थी। आसपास रहने वाले लोग जमा हो जाते थे। वह अजीब तरह से अपनी गर्दन और हाथ-पैर हिलाती थी और फिर कहती थी कि मैं सब कुछ तबाह कर दूंगी। उसे इस तरह देख वह डर गया। लेकिन अब मैंने अपने डर पर काबू पा लिया है। वहीं पुलिस उसे मानसिक रोगी बता रही है। 

सूचना पर पहुंची पुलिस ने कुछ घंटों बाद घटना का खुलासा कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। आपसी विवाद, आर्थिक तंगी समेत कई छोटे-मोटे कारण हैं, जिससे आरोपी ने अपराध करने का दावा किया है। पुलिस आयुक्त ने बताया कि घर में शिवम और जूली के अलावा शिवम के पिता दीप कुमार और बड़ा भाई मोनू (मानसिक रूप से कमजोर) रहता है. बुधवार रात करीब 11 बजे मोनू छत पर सोने चला गया। इधर कमरे में शिवम, जूली सो गई। दीप कमरे में था लेकिन वह जागता रहा। रात 12 से 1 बजे के बीच दीप ने शिवम और फिर जूली का चाकू से गला काट दिया। 

दोनों की मौत होने पर वह छत पर सोने चला गया। इसके बाद उन्होंने कहानी की रचना की। करीब पांच बजे वह नीचे आया और घर में घुसते ही चिल्लाने लगा। तभी आसपास के किराएदार उस जगह पहुंचे जहां शिवम और जूली के शव पड़े थे। शिवम और जूली का अंतिम संस्कार भैरव घाट पर किया गया। शिवम के मानसिक रूप से कमजोर भाई मोनू ने दोनों को आग लगा दी। अंतिम संस्कार के बाद उसके चाचा उसे अपने साथ कन्नौज ले गए। पुलिस अधिकारियों ने मोनू की स्थायी व्यवस्था के लिए कुछ गैर सरकारी संगठनों से संपर्क किया है।