जोशीमठ पर आई मुसीबत प्राकृतिक है या मानव द्वारा लाई गई आपदा, जोशीमठ के विनाश के पीछे कौन?

जोशीमठ में रहे है स्थानीय लोगो का कहना है की ये आपदा गेटवे ऑफ़ हिमालय में अचानक से नहीं आई है

जोशीमठ पर आई मुसीबत प्राकृतिक  है या मानव द्वारा लाई गई आपदा, जोशीमठ के विनाश  के पीछे कौन?

गेटवे ऑफ़ हिमालय के नाम से मशहूर जोशीमठ का अस्तित्व ख़त्म होने की कगार पर है,जैसे हालात है उन हालातो को देख कर लगता है की आने वाले वक्त में गेटवे ऑफ़ हिमालय सिर्फ किताबो तक ही सीमीत रह जायेगा मगर ऐसे में ये सवाल जरूर खड़ा हो रहा है की क्या जोशीमठ पर बना ये खतरा अभी आया है या खतरे की ये तलवार जोशीमठ पर काफी वक्त से लटक रही थी, तो आइये आपको बताते है की क्या है जोशीमठ के गली, चौराहों, घरो, सड़को पर हो रहे भू.धंसाव का कारण.


जोशीमठ में रहे है स्थानीय लोगो का कहना है की ये आपदा गेटवे ऑफ़ हिमालय में अचानक से नहीं आई है, पर्यटकों का ये खूबसूरत जोशीमठ एक अरसे से अपनी दास्तान कह रहा है. जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति का कहना है की काफी लम्बे वक्त से वह इसे लेकर आन्दोलन भी कर रहे है, मगर कोई भी आगे नहीं आया जो इसकी सुनवाई करता.


आपको बता दे की जोशीमठ सदियों पुराने मलबे पर बसा हुआ है, मलबे पर बसे होने के कारण यह काफी लम्बे समय से दरक रहा है.यहाँ तक की सत्तर के दशक में इस बात की पुष्टि के लिए एक 18 लोगो की एक समिति भी बनाई गई थी जिसमे इस बात को साबित किया गया था की जोशीमठ धीरे धीरे अपना अस्तित्व खो रहा है. 18 लोगो की समिति ने इस बात की चेतावनी भी दी थी की जोशीमठ में कोई भी बड़ा निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए क्योंकि भूस्खलन के मामले में यह क्षेत्र ज्यादा संवेदनशील क्षेत्र है।


मगर इस चेतावनी के बाद भी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए निर्माण कार्य जोरो शोरो पर चलता रहा और इसका बड़ा खामियाजा लोगो को तब भुगतना पड़ा जब साल 2021 में चमोली में आपदा आई इस आपदा के दौरान जोशीमठ के सैकड़ो घरो में दरारे आ गई लेकिन फिर भी सरकार की तरफ से कोई सावधानी नहीं बरती गई या ये कहे की सरकार ने ध्यान नहीं दिया और बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम जारी रहा.


समिति के अध्यक्ष का कहना है की जल विद्युत परियोजनाए आल वेदर रोडए होटल बड़े भवनों आदि का निर्माण कार्य जिम्मेदार है। हालांकि हाल के अध्ययन शहर में ड्रेनेज सिस्टम न होने को भी इसका बड़ा कारण मानते हैं। उधर प्रशासन का दावा है कि अब नगर में संचालित सभी निमार्ण कार्यों पर रोक लगा दी गई है।वही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जोशीमठ में भू धसाव को लेकर आज जहां उच्च स्तरीय कमेटी की बैठक लेने की बात कही है, वहीं मुख्यमंत्री का कहना है कि हालात पर नजर बनाए हुए हैं ,आपदा प्रबंधन के सचिव अन्य अधिकारी वहां कैंप कर रहे हैं इसके साथ ही जो भी पुरानी रिपोर्ट हैं उनका भी अध्ययन किया जा रहा है। जोशीमठ को बचाने के लिए सभी कार्य और सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही है।