अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली महिला खिलाड़ी बदहाली के चलते सड़कों पर बेच रही है नमकीन बिस्किट

अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ानी वाली उत्तराखंड की बेटी अपनी बदहाली के चलते सड़कों पर नमकीन बिस्किट बेच रही है।

अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली महिला खिलाड़ी बदहाली के चलते सड़कों पर बेच रही है नमकीन बिस्किट

अंतराष्ट्रीय स्तर पर भारत का मान बढ़ानी वाली उत्तराखंड की बेटी अपनी बदहाली के चलते सड़कों पर नमकीन बिस्किट बेच रही है। क्या भारत का गौरव बढ़ाने के बाद उस खिलाड़ी का कोई सम्मान नहीं बचता। अपनी प्रतिभा से भारत का नाम रोशन करने वाली अंतराष्ट्रीय पैरा एयर पिस्टल शूटर दलजीत कौर अपनी आर्थिक स्तिथि के ख़राब होने चलते अपना और अपनी मां का पेट पालने के लिए सड़कों पर नमकीन और बिस्किट के पैकेट बेचने को मजबूर है। दलजीत कौर का कहना है उत्तराखंड में खेल की कोई कद्र नहीं है। 


दलजीत के जब पिता और भाई थे तब उनकी स्तिथि सामान्य थी लेकिन एक दिन उनके सर से पिता और भाई का साया सर से उठ गया। इसके बाद दलजीत की आर्थिक स्तिथि बद से बदत्तर हो गई। इसके बाद उन्होंने मदद के कई दरवाजे खटखटाएं लेकिन इंकार और निराशा के अलावा उन्हें कुछ ना मिला लोग यहाँ तक भी भूल गए इस देहरादून की बेटी ने ना सिर्फ भारत का मान बढ़ाया था बल्कि उत्तराखंड की शान बढाई थी। दलजीत के हालात इस क़द्र खराब होते चले गए की ना तो घर का किराया दे पा रही थी और ना दो वक़्त की रोटी खा पा रही थी। उनका कहना है कि उत्तराखंड में खेल की कोई कद्र नहीं सरकार अगर चाहती तो उन्हें पैरा खिलाड़ी होने के नाते नौकरी दे सकती थी लेकिन उनकी आज तक किसी ने सुध नहीं ली। 

2004 में तीसरी उत्तरांचल स्टेट शूटिंग चैंपियनशिप में 10 मीटर एयर पिस्टल का स्वर्ण पदक जीतने के साथ दिलराज के कॅरियर की शुरुआत हुई। दिलराज कौर ने पैरालंपिक शूटिंग में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक रजत और राष्ट्रीय स्तर पर 24 स्वर्ण समेत कई पदक अपने नाम किए हैं। इसके अलावा वर्ल्ड पैरा स्पोर्ट्स में पहली सर्टिफाइड कोच, स्पोर्ट्स एजुकेटर जैसी कई उपलब्धियां दलजीत के नाम है। एम.ए, एल.एल.बी की डिग्री होने के बावजूद दलजीत ने नौकरी के लिए कई जगह अप्लाई किया लेकिन हर जगह निराशा मिली। दलजीत सरकार से चाहती है की उन्हें स्पोर्ट्स कोटा के तहत नौकरी मिल जाएं जिससे वो आना आजीविका चला सके साथ पिता और भाई के इलाज के लिए लिया हुआ कर्ज चूका सके।