डिग्री लेने के बजाय बच्चों को अपनी पर्सनल स्किल बढ़ानी चाहिए जिससे उनका भविष्य बेहतर बन सकेगा

जीवन और समय दुनिया के सबसे अच्छे शिक्षक हैं। जीवन हमें समय का सदुपयोग करना सिखाता है और समय हमें जीवन का मूल्य सिखाता है

डिग्री लेने के बजाय बच्चों को अपनी पर्सनल स्किल बढ़ानी चाहिए जिससे उनका भविष्य बेहतर बन सकेगा
जीवन और समय दुनिया के सबसे अच्छे शिक्षक हैं। जीवन हमें समय का सदुपयोग करना सिखाता है और समय हमें जीवन का मूल्य सिखाता है|


ये बात कही है हम सबके प्रिय एपीजे अब्दुल कलाम ने 'शिक्षक दिवस' का मौका हो और पू्र्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की बात ना हो, ऐसा तो हो ही नहीं सकता, एपीजे अब्दुल कलाम अपने आप में एक ऐसी संपूर्ण किताब थे, जिसके हर पन्ने पर मेहनत, हिम्मत और लगन की कहानी लिखी थी। वो देश के उन महान हस्तियों में से एक थे,जिन्होंने साबित किया कि आपकी पहचान आपके काम से होती है, आपके कर्म ही आपको भला औैर बुरा बनाते हैं।

भारत के पूर्व राष्ट्रपति  डॉ कलाम जिन्हें मिसाइल मैन के नाम से जाना जाता है उनका भी शिक्षा के क्षेत्र में काफी अहम योगदान है। बच्चों से बेहद प्यार करने वाले कलाम कई शिक्षण संस्थाओं में गेस्ट लेक्चरर भी रहे। कलाम मानते थे कि डिग्री लेने के बजाय बच्चों को अपनी पर्सनल स्किल बढ़ानी चाहिए जिससे उनका भविष्य बेहतर बन सकेगा।


ये तो हम सब जानते है की एपीजे अब्दुल कलाम को हर कोई मिसाइल मैन के नाम से जानता है मगर क्या आपको पता है की एपीजे अब्दुल कलाम खुद को शिक्षक कहलाना पसंद करते थे। उनका मानना था कि बिना शिक्षक के इंसान कभी भी आगे नहीं बढ़ सकता है। उनका एक किस्सा काफी मशहूर हुआ था, दरअसल एक बार कलाम बनारस विश्वविद्यालय में भाषण के लिए गए थे, वहां किसी ने उनसे सवाल किया कि आप किस रूप में याद किया जाना पसंद करेंगे, मिसाइलमैन या वैज्ञानिक?


तो डॉ कलाम ने कहा 'मैं शिक्षक के तौर पर याद किया जाना पसंद करूंगा' इससे बेहतर कुछ नहीं हो सकता, इसके बाद उन्होंने छात्रों को ज्ञान का मतलब समझाते हुए कहा था कि ज्ञान वह दीपक है, जो हमें अंधकार से दूर रखता है। यह हमें महान और हमारे चरित्र को खूबसूरत बनाता है।'