इस अज्ञान रुपी जीवन में गुरु है प्रकाश गुरु ना हो जीवन में तो जीवन रहें अंधकार: हैप्पी गुरुपूर्णिमा

भारत देश में अनेकों त्यौहार मनाएं जाते है। वहीं आज देशभर में गुरु पूर्णिमा मनाई जा रही है।

इस अज्ञान रुपी जीवन में गुरु है प्रकाश गुरु ना हो जीवन में तो जीवन रहें अंधकार: हैप्पी गुरुपूर्णिमा

भारत देश में अनेकों त्यौहार मनाएं जाते है। वहीं आज देशभर में गुरु पूर्णिमा मनाई जा रही है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आज वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। माना जाता है की द्वापर युग में वेदव्यास प्रथम गुरु थे। महाभारत काल से गुरुओं का स्थान सबसे ऊंचा माना गया है। फिर चाहे वह द्रोहणाचर्या, परशुराम, यह इन महान गुरुओं में से है जिन्होंने अपने शिष्याओं को ना सिर्फ उचित ज्ञान दिया बल्कि अन्धकार से निकाल कर एक प्रकाश रुपी जीवन का स्त्रोत दिया।  


हिन्दू पंचाग के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा में वेदव्यास जी का जन्म हुआ था इसलिए इसे भी व्यासपूर्णिमा भी कहते है। वेदव्यास के पास ज्ञान का भंडार था और उन्होंने ही मानव जाती के चार वेदों की रचना की थी। आज के दिन शिष्य अपने गुरुओं की सम्मान पूर्वक पूजा करते है। जो लोग आषाढ़ पूर्णिमा का व्रत रखते हैं उन्हें भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए और सत्यनारायण व्रत की कथा का श्रवण करना चाहिए। 


इस शुभ अवसर पर करें यह कार्य 

आज गुरुपूर्णिमा के ख़ास अवसर पर सर्वप्रथम अपने ईश्वर की पूजा अर्चना कर उनके चरणों में पुष्प अर्पित करें। इसके बाद अपने माता पिता के चरण स्पर्श करें। साथ ही प्रातः काल नदी में या घर में ही स्नान करके किसी गरीब और जरूरत मंद को दान दे सकते है। शाम के समय घर के आँगन में लगी तुलसी में दीपक जलना चाहिए। आज के दिन तामसिक भोजन ना कर के सात्विक भोजन ग्रहण करें। माना जाता है की आज के दिन पीपल पर मीठा जल चढ़ाने से मां लक्ष्मी प्रशन्न होती है। 


गुरु बिन ज्ञान नहीं,
ज्ञान बिना आत्मा नहीं,
ध्यान, ज्ञान, धैर्य और कर्म,
सब गुरु की ही देन है !!
शुभ गुरु पूर्णिमा
देहरादून लाइव की तरफ से गुरु पूर्णिमा की शुभकामनाएं!