मैं तब अनाथ नहीं हुआ था जब मेरे पिता की मृत्युं हुई थी मैं तब अनाथ हुआ जब मेरे चाचा ने ऐसा किया

लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) में जारी विवाद के बीच चिराग पासवान ने की प्रेस कॉन्फ्रेंस

मैं तब अनाथ नहीं हुआ था जब मेरे पिता की मृत्युं हुई थी मैं तब अनाथ हुआ जब मेरे चाचा ने ऐसा किया

लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) में जारी विवाद के बीच चिराग पासवान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की है। इस दौरान उन्होंने पार्टी में चल रहे विवादों के ऊपर अपना बयान दिया। चिराग ने बड़ा आरोप लगाते हुए कहा कि जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) द्वारा हमारी पार्टी को तोड़ने का प्रयास निरंतर किया जा रहा था। 


चिराग पासवान ने कहा कि ''बिहार चुनाव के दौरान, उससे पहले भी, उसके बाद भी कुछ लोगों द्वारा और खास तौर पर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) द्वारा हमारी पार्टी को तोड़ने का प्रयास निरंतर किया जा रहा था। मेरी पार्टी के पूरे समर्थन के साथ मैने चुनाव लड़ा। कुछ लोग संघर्ष के रास्ते पर चलने के लिए तैयार नहीं थे। मेरे चाचा ने खुद चुनाव प्रचार में कोई भूमिका नहीं निभाई। मेरी पार्टी के कई और सांसद अपने व्यक्तिगत चुनाव में व्यस्त थे.'' 


उन्होंने कहा कि जब मेरे पिता और दूसरे चाचा का निधन हुआ तो मैं अपने चाचा पशुपति कुमार पारस की ओर देख रहा था। मैं तब अनाथ नहीं हुआ जब मेरे पिता की मृत्यु हुई थी। लेकिन, मैं तब अनाथ हो गया जब मेरे चाचा ने मेरे साथ ऐसा किया। पासवान ने कहा कि अगर मेरे चाचा मुझे बोलते कि वो संसदीय दल के नेता बनना चाहते हैं तो मैं तैयार हो जाता। उन्होंने कहा कि हनुमान को अगर राम से मदद मांगनी पड़े तो फिर वह हनुमान काहे के और वह राम काहे के. मालूम हो कि बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान चिराग पासवान ने खुद को हनुमान और प्रधानमंत्री मोदी को राम कहा था। 

पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटाए जाने को लेकर पासवान ने कहा कि ऐसा सुनने में आया है कि मुझे पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया है। उन्होंने कहा, लेकिन पार्टी संविधान के अनुसार, राष्ट्रीय अध्यक्ष को उसी स्थिति में हटाया जा सकता है जब या तो उसकी मृत्यु हो जाए या वह इस्तीफा दे दे।  चिराग पासवान ने  कहा कि जब मेरी तबीयत खराब थी तब इन लोगों ने मिलकर साजिश की। मैंने तब अपने चाचा से बात करने की कोशिश भी की थी लेकिन उनसे बात ही नहीं हो पाई। चिराग ने कहा कि सदन के नेता की नियुक्ति संसदीय समिति के फैसले के आधार पर होती है, न कि सांसदों के चाहने से।