येड़ा बोलने से हरीश रावत और उनके बेटे आनंद रावत में हुई तकरार, ,मेरे विचारों से परेशान है मेरे पिता

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बेटे आनंद ने रविवार को एक फेसबुक पोस्ट में लिखा, "मेरे पिता मेरे विचारों से परेशान रहते हैं

येड़ा बोलने से हरीश रावत और उनके बेटे आनंद रावत में हुई तकरार, ,मेरे विचारों से परेशान है मेरे पिता

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के बेटे आनंद ने रविवार को एक फेसबुक पोस्ट में लिखा, "मेरे पिता मेरे विचारों से परेशान रहते हैं, शायद उन्होंने हमेशा एक नेता के दृष्टिकोण से मेरी बात सुनी लेकिन उन्होंने मुझे एक 'येड़ा' (क्रैकपॉट) व्यक्ति माना। इसके जवाब में, रावत ने भी फेसबुक का सहारा लिया और लिखा कि उन्होंने "युवाओं के लिए आनंद के काम की हमेशा सराहना की है। मैंने कभी भी आनंद को 'येड़ा' नहीं माना था, हालांकि समय के साथ मुझे उन तर्ज पर सोचने पर मजबूर होना पड़ा मेरे पिताजी मेरे नायक है, और उनकी “ never say die “ attitude या कहे जूझरूपन करोड़ों युवाओं को प्रेरणा देता है। 

आनंद रावत, जो एक पूर्व राज्य युवा कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में पार्टी के टिकट के लिए एक मजबूत दावेदार माने जाते थे, लेकिन उन्हें एक भी टिकट नहीं मिला, उन्होंने कहा कि उन्होंने सोमवार को 'येड़ा' टिप्पणी पर अपना विचार स्पष्ट किया और लिखा की इतिहास के पन्ने पलटें तो पाएंगे कि जवाहरलाल नेहरू जी एक धनी और अच्छे परिवार से आते थे। लेकिन देश की आजादी के लिए अपनी विलासिता का त्याग कर पहली बार जेल गए थे। क्यूंकि वो जानते थे की एक दिन देश जरूर आजाद हो जाएगा।  लेकिन उनमें देश के प्रति जोश, जुनून था और उन्होंने अपने जीवन का एक बड़ा हिस्सा जेल में बिताया। येड़ा” मतलब पागल तो बिलकुल नहीं होता, क्योंकि सविधान के अनुसार पागल व्यक्ति जनप्रतिनिधि नहीं बन सकता, और येड़ा मतलब “पागल “ होता तो केजरीवाल जी शिन्दे जी पर मानहानि का दावा कर चुके होते ?। 

आनंद ने समान तकनीकी योग्यता वाले अन्य राज्यों के छात्रों की तुलना में उत्तराखंड के युवाओं के लिए खराब भुगतान" के मुद्दे को उठाते हुए, आनंद ने अपने पिता और अन्य राजनेताओं को "मामले को ठीक से उठाने में विफल" के लिए कटघरे में खड़ा कर दिया। आनंद ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि ज्यादातर नेताओं के सोशल मीडिया पोस्ट जन्मदिन की बधाई और संवेदना से भरे हुए थे, ''लेकिन राज्य के कल्याण के बारे में कोई राजनेता संदेश नहीं देता है । उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में 72 पॉलिटेक्निक और 48 आईटीआई हैं जो हर साल 20,000 कुशल युवाओं का निर्माण कर रहे हैं। उन्होंने केरल का उदाहरण देते हुए कहा, "सिडकुल में, पॉलिटेक्निक युवाओं को आमतौर पर 12,974 रुपये प्रति माह और आईटीआई युवाओं को 10,340 रुपये प्रति माह मिलते हैं। 


अपने पिता को "एक नायक" बताते हुए उन्होंने कहा, "मुझे लगता है कि 'झकास' के बाद सबसे लोकप्रिय शब्द 'येड़ा' है। 'येड़ा' शब्द का इस्तेमाल पहली बार उत्तराखंड की राजनीति में किया गया है और ऐसा लगता है। लोगों के साथ अच्छा नहीं हुआ। इसलिए, मैं माफी मांगना चाहता हूं। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहली बार 2012 में तत्कालीन गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे से यह शब्द सुना था, जिन्होंने अरविंद केजरीवाल के लिए इसका इस्तेमाल किया था। केजरीवाल जी ने हिंदी में इसकी व्याख्या 'जुनूनी' के रूप में की और 2013 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने इस शब्द का सही अर्थ साबित किया। इस बीच, पूर्व सीएम के प्रवक्ता सुरेंद्र कुमार ने कहा, "यह पिता और पुत्र के बीच एक हल्का-फुल्का आदान-प्रदान है और इसे उसी भावना से लिया जाना चाहिए। 


क्या है मामला 

दरअसल पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बीते रविवार को फेसबुक पेज का शहर लेते हुए अपने बेटे के लिए लिखा था की आनंद मैंने तुम्हें कभी येड़ा नहीं समझा बल्कि वक्त ने मजबूरन समझा दिया है। चाहे 2012 में लालकुआं हो या 2017 में जसपुर। मुझे गर्व है, तुमने नशे से लड़ने के लिए उत्तराखंड के परंपरागत खेलों को प्रचारित-प्रसारित किया। कितने युवा नेता हैं जो तुम्हारी तरह युवाओं तक "रोजगार अलर्ट" के लिए रोजगार समाचार पहुंचाते हैं। कितने नेता है जो लड़के और लड़कियों को सेना या पुलिस में भर्ती हो सके इस हेतु प्रारंभिक प्रशिक्षण की व्यवस्था करते हैं। 

मुझे तुम्हारी सोच पर मुझे गर्व है। आज जब सारी राजनीति हिंदू-मुसलमान हो गई है। रोजगार, महंगाई, सामाजिक समता व न्याय, शिक्षा व स्वास्थ्य जैसे प्रश्न खो गए हैं। मैंने रोजगार, शिक्षा को प्रथम लक्ष्य बनाकर काम किया लेकिन मैं भी कहीं खो गया। मैं रोजगार को केरल मॉडल पर लाया तुलनात्मक रूप में सर्वाधिक तकनीकी संस्थान जिसमें नर्सिंग भी सम्मिलित हैं, हमारे कार्यकाल में खुले और सर्वाधिक भर्तियां हुई। आज शहर का मिजाज बदला हुआ है। परंतु तुमने बुनियादी सवाल और हम जैसे लोगों की कमजोरियों पर चोट की है। डठे रहो, बाप न सही-समय तुम जैसे लोगों के साथ न्याय करेगा।