उत्तराखंड में भी बिखरेगी केसर की खुशबु उत्त्पादन के लिए चुने गए है पांच गांव

अब उत्तराखंड भी महकेगा केसर की खुसबू से केसर की खेती को बढ़ावा देने के उदेश्य से चुने गए उत्तरकाशी के पांच गांव

उत्तराखंड में भी बिखरेगी केसर की खुशबु उत्त्पादन के लिए चुने गए है पांच गांव

पूरी दुनिया में सबसे महंगा बिकने वाले केसर की खुशबु से अब उत्तराखंड में भी महकेगा। जहां अभी तक कश्मीर घाटियों में केसर का उत्त्पादन होता रहा अब इसका उत्त्पादन जल उत्तराखंड के भूमि पर शुरू होगा। पिछले साल हरसिल घाटी में कुछ काश्तकारों को ट्रायल के लिए केसर के बीज दिए गए थे, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। और इसी के चलते उद्यान विभाग ने जिला योजना से घाटी के पांच गांवों में केसर की खेती को बढ़ावा देने की योजना बनाई है। 


उद्यान विभाग उत्तराखंड के पांच गांव चुने है जिनमे से सुक्की, झाला, मुखबा, पुराली व जसपुर है वहीं इस योजना के तहत कम से कम 38 काश्तकारों को योजना का लाभ दिया जाएगा और लगभग 35 से 37 नाली भूमि पर केसर की खेती होगी। विभाग इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए जम्मू और कश्मीर के शेर-ए-कश्मीर कृषि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विवि का सहयोग ले रहा है। 


डा. रजनीश सिंह, मुख्य उद्यान अधिकारी,उत्तरकाशी ने बताया की इस योजना के तहत जिला योजना 2021-22 में 9.8 लाख का बजट रखा गया है। काश्तकारों को केसर के बीज उपलब्ध कराने के साथ उन्हें प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। जरूरत हुई तो बागवानी और वानिकी विवि भरसार व कृषि विवि पंतनगर का भी सहयोग लेंगे। बता दे की हरसिल उत्तराखडं के उत्तरकशी राज्य में स्तिथ है। यह स्थान गंगोत्री को जाने वाले मार्ग पर भागीरथी नदी के किनारे स्थित है

सीएचओ डा. रजनीश सिंह का कहना है कि केसर की खेती के लिए मौसम का अनुकूल होना बेहद जरुरी है। कश्मीर के आलावा हरसिल में भी अच्छी बर्फ़बारी होती है। जो की केसर की खेती के लिए उत्तम है। नदी द्वारा बहाकर लाई गई मिट्टी (जलोढ़ मृदा) में केसर का अच्छा उत्पादन होता है। हिमालयी क्षेत्र होने के चलते हरसिल घाटी में भी ऐसी ही मिट्टी है। बताया कि सितंबर-अक्तूबर में बीज लगाने के बाद मई-जून में उत्पादन मिलेगा।