धर्म की दीवार गिराते शाहिद अली पिछले आठ साल से निभा रहे है रामलीला के किरदार

धर्म की प्रेरणा दिखाते हुए श्रवणनाथ नगर पार्क में आयोजित रामलीला मंचन के दौरान देखने को मिला जहाँ एक मुस्लिम युवक शाहिद अली रामलीला मंचन पर रामायण के अलग अलग किरदारों को करता है

धर्म की दीवार गिराते शाहिद अली पिछले आठ साल से निभा रहे है रामलीला के किरदार

धर्म के नाम पर लोग कितना ही भेदभाव या नफरत कर ले या धर्म की दीवार बनाकर देश और राज्य में माहौल ख़राब करते रहते है लेकिन देश के हर राज्य में कहीं ना कहीं कुछ ऐसे लोग होते है जो धर्म में भेदभाव या धर्म की दीवार को नहीं मानते है. वही ऐसा ही कुछ सद्भाव और धर्म की प्रेरणा दिखाते हुए श्रवणनाथ नगर पार्क में आयोजित रामलीला मंचन के दौरान देखने को मिला जहाँ एक मुस्लिम युवक शाहिद अली रामलीला मंचन पर रामायण के अलग अलग किरदारों को करता है.

 

आठ साल से निभा रहे है किरदार

वही शाहिद अली लगभग आठ सालों से रामलीला मंचन के लिए काम कर रहे है. शाहिद अली लखीमपुर खीरी के रहने वाले है और वो बताते है की मुझे बचपन से ही रामलीला में रूचि थी. इसके आलावा शाहिद अपने परिजनों के साथ बचपन में रामलीला देखने जाते थे. बचपन में रामायण से  इतना प्रभावित हुए की रामायण रूचि शाहिद की छवि में उतर गई देखते देखते वो इतना खो जाते थे की उनका मन भी रामलीला के किरदार को निभाने के लिए करने लगा.

 

 

दोस्त ने दिखाई थी रामलीला

शाहिद की काहानी सिर्फ यही नहीं खत्म हुई उन्होंने आगे बताया की आज से आठ साल पहले वह हरिद्वार आए थे उनके ममेरे भाई के दोस्त उन्हें रामलीला दिखाने ले गए. इसके बाद शाहिद ने रामलीला में अभिनय करने की इच्छा जाहिर की. लेकिन जब उन्हें पहली बार किरदार मिला तो किसी पुरुष का नहीं बल्कि अहिल्या का किरदार निभाने को मिला. लेकिन शाहिद को कोई परेशानी नहीं हुई बल्कि बखूबी के साथ अहिल्या किरदार को निभाया.  लोगों को शाहिद का अहिल्या किरदार इतना  पसंद आया की लोगों ने शाहिद की बेहद सरहना की साथ ही लगे हाथ उन्हें किरदार मिलता गया. और इस तरह से आठ सालों से किरदार निभाते हुए चले आ रहे है.

 

 

किरदारों से होता है महानता का अनुभव

शाहिद का कहना है जब लोग राम सीता को जब इतना सम्मान देते है तो यह बेहद हैरानिपूर्ण होता है . साथ हर उम्र की महिलाए युवक और पुरुष जब मेरे पैर छुते है तो इन चरित्रों की महानता का अनुभव होता है. इस देश के हर युवा को रामायण के बारे में बल्कि राम सीता की महानता का पता होना चाहिए क्यूंकि इसमें हमारी देश की संस्कृति और  परंपराओं को जानने का अवसर मिलता है.